केसी त्यागी। फाइल फोटो
डीपी आर्य, हापुड़। समाजवादी विचारधारा के वरिष्ठ नेता किशन चंद त्यागी को राजनीति के गलियारों में K.C. Tyagi के नाम से सम्मान की नजरों से देखा जाता है। बीते कुछ समय से अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे केसी त्याग आज इसलिए चर्चा का विषय हैं क्योंकि आज ही (10 जनवरी) उनके जदयू से बाहर निकाले जाने की खबरें सामने आ रही हैं।
कहा जा रहा है कि जनता दल यूनाइटेड ने उनसे किनारा कर लिया है। गाजियाबाद जिले के मोरटा गांव के मूल निवासी केसी त्यागी ने राजनीति की शिक्षा अपने विद्यालय की पढ़ाई के साथ ही ली।
उन्होंने कॉलेज जीवन से ही राजनीतिक गतिविधियां आरंभ कर दी थीं। कॉलेज की राजनीति के उपरांत 1974 में उन्हाेंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और युवा जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए। उनको राजनीतिक संकट मोचक के रूप में देखा जाता है।
ऐसे समाजवादी नेता बने केसी त्यागी
उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ ही शरद यादव के साथ मिलकर कार्य किया। यहीं से उनमें समाजवाद विचारधारा ने घर कर लिया।
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को वह अपना राजनीतिक पिता मानते हैं। उनके साथ रहकर उन्होंने गांव-किसान और गरीब की लड़ाई का ककहरा सींखा।
लंबे समय तक केसी त्यागी ने चौधरी चरण सिंह के मीडिया सलाहकार का दायित्व निभाया। संगठन के साथ ही वह चुनावी राजनीति में आगे बढ़े।
पहले लोकसभा चुनाव में करना पड़ा हार का सामना
उन्होंने हापुड़-गाजियाबाद लोकसभा सीट से रालोद से 1984 में चुनाव लड़ा, लेकिन केएन सिंह के सामने हार का सामना करना पड़ा।
केसी त्यागी की क्षेत्र में अच्छी पकड़ होने के बावजूद उनके प्रतिद्वंदी केएन सिंह को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की सहानुभूति का लाभ मिला।
उसके बाद केसी त्यागी ने 1989 में फिर भाग्य आजमाया और सांसद बन गए। उसके साथ ही उनकी समाजवादी विधारधारा और मजबूत होती गई।
कर्पूरी ठाकुर से लेकर नीतीश तक के राजनीतिक उतार-चढ़ाव में रहे साथ
कर्पूरी ठाकुर, विश्वनाथ प्रताप सिंह, पूर्व पंधानमंत्री चंद्रशेखर, चौधरी देवीलाल, शरद यादव, मुलायम सिंह और जॉर्ज फर्नाडीज के साथ वह राजनीति में प्रत्येक उतार-चढ़ाव में साथ रहे।
आपातकाल में वह 18 महीने जेल में रहे। उसके बाद उन्होंने सपा ज्वाइन की और राष्ट्रीय महासचिव बनें। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल-यू से 2002 में मेरठ से सांसद का चुनाव लड़ा और भाजपा से गठबंधन होने के बावजूद परास्त हो गए।
वह बिहार से 2013 में राज्यसभा के सांसद और फिर गन्ना निगम के चेयरमैन रहे। वह जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे और बिहार के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रहे।
केसी त्यागी का मुखर वक्ता के रूप में जाना जाता है। वह किसी भी स्थानीय, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे पर बेरोकटोक विचार रखने के लिए जाने जाते हैं। |
|