आर्मी जवान शंभू कुमार। (जागरण)
संवाद सूत्र, बछवाड़ा (बेगूसराय)। प्रखंड के बछवाड़ा गांव निवासी स्व. रामचंद्र चौधरी के पुत्र भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट में नायब सूबेदार के पद पर तैनात शंभू कुमार ने शंख वादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर देश और जिले का नाम रोशन किया है।
सीमित संसाधनों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले शंभू कुमार आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उन्होंने समर्पण, साधना और संकल्प से शंख की गूंज को विश्व पटल तक पहुंचाया। शंभू ने एक सांस और एक धुन में 80 सेकंड तक शंख बजाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया है।
शंभू कुमार ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। वर्ष 2005 में उन्होंने भारतीय सेना में योगदान दिया। सेना में रहते हुए उन्होंने अनुशासन और साधना के साथ शंख वादन का अभ्यास जारी रखा।
इसके परिणामस्वरूप उन्होंने लगातार 53 मिनट तक शंख बजाकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, इंडिया स्टार बुक ऑफ रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड और भारत वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया।
वर्ष 2020 में शंभू कुमार ने एक सांस और एक धुन में 80 सेकंड तक शंख बजाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में विश्व रिकॉर्ड कायम किया। इसके बाद 2021 में इंग्लैंड आर्मी के सार्जेंट फिलिप्स पाल्मर द्वारा बनाए गए 73 सेकंड के बिगुल रिकॉर्ड को तोड़ते हुए उन्होंने 83 सेकंड तक एक सांस में वादन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
इतना ही नहीं, वर्ष 2024 में आस्ट्रेलियाई वाद्य यंत्र डिडगैरीडो में भी उन्होंने कमाल किया। पहले यह रिकॉर्ड आस्ट्रेलिया के लाचलान फिलिप्स के नाम 65.66 सेकंड का था, जिसे शंभू कुमार ने 89.43 सेकंड तक बजाकर नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया।
उनकी इन उपलब्धियों के लिए उपसेना प्रमुख सीपी मोहंती, रक्षा मंत्रालय के एडीजी भारत भूषण बाबू और आर्मी सेंट्रल कमांड द्वारा कई बार प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है। शंभू कुमार की यह यात्रा साबित करती है कि समर्पण, साधना और संकल्प से ‘शंख’ की गूंज विश्व पटल तक पहुंच सकती है। |