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जागरण संवाददाता, वाराणसी। गोवंश के संरक्षण के लिए ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए गोहत्या के अपराध में संलिप्त तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा देने वालीं गुजरात के अमरेली की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रिजवाना बुखारी शुक्रवार को काशी पहुंचीं।
यहां उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। न्यायाधीश रिजवाना बुखारी ने अपना निर्णय सुनाते हुए गाय को हिंदुओं के लिए पवित्र, भारतीय संस्कृति और आस्था का आधार बताते हुए गोरक्षा के प्रति जो प्रतिबद्धता दर्शाई, उसकी देशभर में सराहना हो रही है।
न्यायाधीश रिजवाना का श्रीविद्या मठ में पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि न्याय के सिंहासन पर विराजमान होकर जब कोई सत्य एवं धर्म की रक्षा के लिए साहसिक निर्णय लेता है तो वह राष्ट्र और संस्कृति दोनों के लिए वंदनीय होता है।
न्यायाधीश रिजवाना के इस कदम से अन्य जजों को भी प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने न्यायाधीश रिजवाना के गोसेवा के कार्य को पुण्यदायी बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
न्यायाधीश रिजवाना बुखारी ने बीते नवंबर में गोहत्या के एक मामले में तीन आरोपितों कासिम, सत्तार और अकरम को गुजरात पशु संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2017 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ-साथ 18 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। गुजरात में यह पहला मामला है, जिसमें किसी अदालत ने गोहत्या के अपराध में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। |
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