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जागरण संवाददाता, लखनऊ। चंदरनगर और ठाकुरगंज (सीएचसी) अस्पतालों में सोनोलाजिस्ट की तैनाती के आदेश के बाद भी मरीजों को रोजाना अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। दोनों अस्पतालों में सप्ताह में महज दो दिन ही अल्ट्रासाउंड हो पा रहे हैं, जिससे खासतौर पर महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब उसी दिन जांच जरूरी हो, तो गरीब और जरूरतमंद मरीज इलाज कैसे कराएं।
चंदरनगर अस्पताल पहुंची गर्भवती महिला रीना ने बताया कि डाक्टर ने उसी दिन अल्ट्रासाउंड कराने को कहा था, लेकिन अस्पताल में बताया गया कि आज जांच नहीं होगी। प्राइवेट सेंटर में 1200 रुपये मांगे गए, इतना पैसा कहां से लाएं वहीं ठाकुरगंज अस्पताल में पेट दर्द से परेशान महिला शबनम को भी बिना अल्ट्रासाउंड के ही दवाइयों के सहारे लौटना पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग ने भले ही सोनोलाजिस्ट की संविदा भर्ती और तैनाती के आदेश जारी कर दिए हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। ठाकुरगंज संयुक्त अस्पताल के अधीक्षक एसपी सिंह ने बताया कि यहां सोनोलाजिस्ट काकोरी सीएचसी से आते हैं। वे शुक्रवार और शनिवार को ही उपलब्ध रहते हैं, इसी वजह से रोजाना अल्ट्रासाउंड संभव नहीं हो पा रहा। हालांकि हम मरीजों की सूची बनाकर उसी दिन अधिक से अधिक जांच कराने की कोशिश करते हैं।
वहीं चंदरनगर अस्पताल के अधीक्षक आनंद त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड सुविधा देना फिलहाल संभव नहीं है। हमारे यहां सोनोलाजिस्ट बाहर से आते हैं और सप्ताह में दो दिन ही उपलब्ध हैं, इसलिए रोज जांच कराना तकनीकी रूप से संभव नहीं हैं
संयुक्त रुप से मरीजों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच सेवाएं रोज उपलब्ध होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर जिस मरीज को बुधवार को जांच करानी हो वह शुक्रवार का इंतजार करे या तो बाहर करवाए। संविदा व्यवस्था के बजाय स्थायी समाधान निकालना जरूरी है, ताकि मरीजों को निजी जांच केंद्रों पर निर्भर न रहना पड़े। जब आदेश हो चुके हैं और तैनाती भी बताई जा रही है, तो सवाल यही है हफ्ते में दो दिन की सुविधा से आम मरीज को असली सहूलियत आखिर कब मिलेगी? |
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