कोलकाता में आइ-पैक कार्यालय पर ईडी का छापा, तिलमिलाईं सीएम ममता ले गईं दस्तावेज (फोटो- एक्स)
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। ईडी की ओर से गुरुवार को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक व चुनावी प्रबंधन का काम कर रही संस्था इंडियन पालिटिकल एक्शन कमेटी (आइ-पैक) और इसके निदेशक प्रतीक जैन के परिसरों पर चलाए गए मैराथन तलाशी अभियान के दौरान हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।
कोयला तस्करी मामले में धनशोधन की जांच के तहत लगभग 12 घंटे तक चली छापेमारी से तिलमिलाई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुबह लाउडन स्ट्रीट स्थित जैन के आवास पर पहुंची, उसके बाद साल्टलेक सेक्टर-5 स्थित कार्यालय गईं। ममता यहां से एक फाइल व लैपटॉप लेकर निकलीं। इसके बाद वह यहां करीब चार घंटे तक रहीं।
उन्होंने ईडी की कार्रवाई की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी छापेमारी के दौरान हार्ड डिस्क, पार्टी के आंतरिक व चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज, संवेदनशील संगठनात्मक डाटा और उम्मीदवारों की गोपनीय सूची, एसआइआर का डाटा सहित लैपटॉप, फोन व दस्तावेज सब चुराकर व लूटकर ले गई। ममता ने कहा कि यह अपराध है।
इसके लिए ईडी के खिलाफ एफआइआर की जाएगी। दूसरी ओर ईडी ने जांच में बाधा डालने व दस्तावेज व डिजिटल सुबूतों को जबरन छीनने का आरोप लगाया। इसे लेकर ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दूसरी ओर तृणमूल भी ईडी की कार्रवाई का वरोध करते हुए हाई कोर्ट पहुंची है।
मामले में आइ-पैक को भी शामिल किया गया है। दोनों मामलों में शुक्रवार को सुनवाई होगी। बता दें कि प्रतीक जैन आइ-पैक के सह-संस्थापक व तृणमूल कांग्रेस के आइटी प्रकोष्ठ के प्रमुख भी हैं।
यह पूरी कार्रवाई नवंबर 2020 में दर्ज सीबीआइ की एफआइआर और उसके बाद ईडी द्वारा दर्ज ईसीआइआर पर आधारित है, जिसमें मुख्य आरोपित अनूप माजी और उसके सहयोगियों पर ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टा क्षेत्रों से अवैध रूप से कोयला खनन करने और उसे बंगाल के विभिन्न जिलों में बेचने का आरोप है।
हवाला नेटवर्क
ईडी की जांच में तस्करी के पीछे एक बड़े हवाला नेटवर्क का पता चला है। जांच के अनुसार, कोयला तस्करी से प्राप्त करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को हवाला आपरेटरों के जरिए स्थानांतरित किया गया। चौंकाने वाला राजफाश यह हुआ कि इस नेटवर्क के जरिए आइ-पैक को भारी मात्रा में फंड ट्रांसफर किया गया। इस कड़ी के तहत दिल्ली में चार और कोलकाता में छह स्थानों पर छापेमारी की गई।
ईडी के अनुसार, तलाशी की प्रक्रिया पेशेवर तरीके से चल रही थी, दोपहर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने काफिले और भारी पुलिस बल के साथ आइ-पैक कार्यालय तथा जैन के आवास पर पहुंच गईं और वहां से महत्वपूर्ण भौतिक दस्तावेज और इलेक्ट्रानिक उपकरण अपने कब्जे में ले लिए। उनके सहयोगियों और राज्य पुलिस ने डिजिटल और दस्तावेजी सुबूतों को जबरन हटा दिया। इस दौरान कोलकाता के पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा भी उपस्थित थे।
कोलकाता पुलिस की भूमिका पर सवाल
छापेमारी के दौरान कोलकाता पुलिस के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें पुलिस आयुक्त और उपायुक्त (दक्षिण) शामिल थे, ने परिसर में प्रवेश कर ईडी अधिकारियों के पहचान पत्रों की जांच की। ईडी का कहना है कि उनकी कार्रवाई पूरी तरह कानूनी थी, लेकिन राज्य प्रशासन के हस्तक्षेप ने पीएमएलए के तहत चल रही जांच में बड़ी बाधा उत्पन्न की है।
विवाद बढ़ता देख ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह छापेमारी किसी राजनीतिक दल या चुनाव से प्रेरित नहीं है। किसी भी पार्टी कार्यालय की तलाशी नहीं ली गई है। यह कार्रवाई मनी लांड्रिंग के खिलाफ एक नियमित कानूनी प्रक्रिया है। तलाशी अभियान पूरी तरह से स्थापित कानूनी सुरक्षा उपायों के अनुरूप चलाया गया है।
ईडी के खिलाफ दर्ज कराई एफआइआर प्रतीक जैन के स्वजन की ओर से कोलकाता के शेक्सपियर सरणी थाने में ईडी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई है। उन्होंने लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास में चोरी का लगाया आरोप है।
शाह सबसे खराब गृह मंत्री
ममता ने गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला करते हुए पूछा कि क्या ईडी, अमित शाह का काम राजनीतिक पार्टी की हार्ड डिस्क, उम्मीदवारों की सूची व रणनीति चुराना या इकट्ठा करना है? कार्रवाई को डराने-धमकाने का कृत्य बताते हुए ममता ने कहा कि यह (अमित शाह) सबसे खराब व अक्षम गृह मंत्री जो देश की सुरक्षा नहीं संभाल पा रहे हैं, वे अब छापेमारी कराकर मेरी पार्टी के सारे दस्तावेज ले जा रहे हैं।
कहा कि अगर मैं भाजपा के कार्यालय पर रेड करूं तो क्या होगा? एक तरफ, वे बंगाल में चुनाव से पहले एसआइआर करवाकर मतदाताओं के नाम हटा रहे हैं, दूसरी तरफ केंद्रीय एजेंसियों के जरिए मेरी पार्टी के बारे में सारी जानकारी छीनने की कोशिश कर रहे हैं। |
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