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वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन: जेडी वैंस की अनुपस्थिति ने उठे सवाल, चाणक्यनीति की हो रही चर्चा

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वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन पर जेडी वैंस की अनुपस्थिति ने उठे सवाल (फोटो- रॉयटर)



डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पूरी दुनिया में हलचल मची हुई है। \“ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व\“ नाम के इस सैन्य अभियान में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने कराकस में छापा मारकर मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ा और न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां वे नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

ट्रंप ने इसे “परफेक्टली एक्जीक्यूटेड“ ऑपरेशन बताते हुए वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर अमेरिकी नियंत्रण की बात की, लेकिन इस विजय के सार्वजनिक जश्न में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में कानाफूसी शुरू कर दी है।

मार-ए-लागो में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और वार रूम की तस्वीरों में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ और अन्य प्रमुख अधिकारी ट्रंप के साथ नजर आए, लेकिन वैंस कहीं नहीं थे।

सूत्रों के अनुसार, वैंस को जानबूझकर मार-ए-लागो से दूर रखा गया ताकि ऑपरेशन की गोपनीयता बनी रहे। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने इसे सुरक्षा कारण बताया, लेकिन विश्लेषक इसे गहरा राजनीतिक संकेत मान रहे हैं।

वैंस, जो इराक युद्ध के अनुभव से विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ रहे हैं और ट्रंप के “अमेरिका फर्स्ट“ सिद्धांत के प्रमुख समर्थक माने जाते हैं, इस अभियान में सार्वजनिक रूप से चुप रहे।

उन्होंने बाद में एक बयान में तेल संपत्तियों को “चोरी की संपत्ति“ बताते हुए ऑपरेशन का समर्थन किया, लेकिन उनका लहजा सतर्क और संयमित था। विशेषज्ञों का मानना है कि वैंस ने खुद को इस जोखिम भरे कदम से दूरी बनाई रखी, क्योंकि यह ट्रंप के पहले कार्यकाल के “नो न्यू वॉर्स“ वादे से उलट लगता है।

इसी तरह, राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गैबार्ड भी इस ऑपरेशन की योजना से बाहर रखी गईं और सार्वजनिक मंचों पर अनुपस्थित रहीं। गैबार्ड, जो पहले वेनेजुएला पर अमेरिकी दबाव की आलोचना करती थीं, ने बाद में सोशल मीडिया पर सेना की तारीफ की, लेकिन उनका लहजा औपचारिक और दूर का लगा।
चाणक्यनीति की याद

भारतीय विश्लेषकों और सोशल मीडिया पर इस अनुपस्थिति को प्राचीन रणनीतिकार चाणक्य की नीति से जोड़ा जा रहा है। चाणक्य कहते थे कि सत्ता के खेल में बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा विकल्प खुले रखता है और विफलता की स्थिति में खुद को बचाता है।

वैंस की यह “रणनीतिक चुप्पी“ और दूरी को इसी नजरिए से देखा जा रहा है –आज की जीत कल का बोझ न बने। वैंस का भारत से व्यक्तिगत जुड़ाव (पत्नी उषा वैंस के माध्यम से) इस तुलना को और मजबूत करता है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला को “चला रहा है“ और तेल की बिक्री से 30-50 मिलियन बैरल अमेरिका को मिलेंगे, लेकिन रुबियो ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई स्थायी कब्जा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्राजील, कोलंबिया और मेक्सिको ने इसकी निंदा की, जबकि कुछ रिपब्लिकन इसे “अमेरिका इज बैक“ का संकेत बता रहे हैं।

यह अभियान ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी विदेश नीति कार्रवाई है, लेकिन वैंस की अनुपस्थिति से सवाल उठ रहे हैं: क्या यह आंतरिक मतभेद है या भविष्य की राजनीति की तैयारी? आने वाले दिन बताएंगे।
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