सरकार ने एक बार फिर जुगाड़ गाड़ी पर रोक को लेकर सख्त आदेश दिया।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । सरकार ने एक बार फिर जुगाड़ गाड़ी पर रोक को लेकर सख्त आदेश दिया है। ऐसा नहीं है कि इसके परिचालन पर रोक को लेकर यह पहली बार आदेश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार इससे पहले भी कई बार इसके परिचालन पर रोक लगा चुकी है। इसके बाद भी जिले की सड़कों पर जुगाड़ गाड़ी का परिचालन धड़ल्ले से हो रहा है।
शहर से लेकर गांवों तक इसकी संख्या बढ़ती जा रही है। शहर की हर अति व्यस्तम सड़क हो या एनएच-एसएच सभी जगह ये धड़ल्ले से चल रहे हैं।
पुलिस-परिवहन अधिकारी भी सामने से गुजरते इनको देखा करते हैं। कार्रवाई नहीं होने से चालकों के हौसले बुलंद हैं। जानकारी के अनुसार परिवहन विभाग ने पिछले वर्ष करीब आधा दर्जन जुगाड़ गाड़ी पर कार्रवाई की गई। नियमित अभियान नहीं चलने से चालक बेखौफ होकर इसका परिचालन कर रहे हैं।
खतरनाक तरीके से छड़ लेकर चलने से सहमे रहते राहगीर
यूं तो जुगाड़ गाड़ी पर कई तरह के सामान ढोए जा रहे हैं। क्षमता से अधिक छड़ जो गाड़ी से काफी बाहर होती हैं, उससे राहगीर सहमे रहते हैं। कई बार इससे दर्दनाक हादसे हो चुके हैं।
शहर के अति व्यस्ततम मोतीझील हो या सरैयागंज टावर, गोला रोड, घिरनीपोखर, जवाहरलाल रोड, मिठनपुरा, जूरन छपरा आदि जगहों पर भी इनका परिचालन हो रहा है। इनके लिए कायदा-कानून व आदेश का कोई महत्व नहीं है। जुर्माना नहीं होने से बेखौफ यह जहां चाहते, वहां परिचालन करते हैं।
धुएं से फैल रहा प्रदूषण व बीमारियां, जाम की भी वजह
शहर के प्रदूषण की भी यह एक वजह बन रहे हैं। काफी संख्या में जुगाड़ गाड़ी चलने से शहर प्रदूषित हो रहा है। इससे कच्चा धुआं निकलता है, जिससे प्रदूषण फैल रहा है। जुगाड़ तकनीक से इसे बनाया जाता है।
डीजल पंपसेट, बाइक का इंजन, बाइक का हैंडल, माल ढोने वाला रिक्शा या फिर ठेला की बाडी को मिलाकर यह बनाया जाता है। इसके चलाने वाले के पास चालक का कोई लाइसेंस तक नहीं होता। नाबालिग भी इसे धड़ल्ले से चला रहे हैं।
नहीं होता निबंधन, घटना के बाद नहीं हो पाती पहचान
जुगाड़ गाड़ी का परिवहन विभाग में निबंधन नहीं होता है। इससे इस पर कोई नंबर भी अंकित नहीं होता। यह बिहार मोटरयान अधिनियम 1992 की किसी भी धारा अथवा नियम में वर्णित वाहनों के मानकों पर खरा नहीं उतरता। इसका न तो इंजन नंबर होता और न ही चेचिस नंबर।
किसी मान्यता प्राप्त कंपनी द्वारा नहीं बनाए जाने से इसका निबंध भी नहीं होता। साथ ही परमिट, बीमा, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र निर्गत नहीं किया जाता। इससे किसी प्रकार की दुर्घटना होने पर प्रभावित व्यक्ति या वाहन की क्षतिपूर्ति दावों का भुगतान भी नहीं किया जाता। घटना होती है तो निबंधन नहीं होने से चालक व गाड़ी की पहचान नहीं होगी।
जुगाड़ गाड़ी का परिचालन नहीं होने का प्रशासन दे चुका हलफनामा
जिले की सड़कों पर भले ही जुगाड़ गाड़ी का परिचालन धड़ल्ले से हो रहा हो, इसकी संख्या लगातार बढ़ रही हो, मगर प्रशासन का मानना है कि जिले में जुगाड़ गाड़ी का परिचालन नहीं हो रहा है। जानकारी के अनुसार इस संबंध में प्रशासन कई वर्ष पूर्व हलफनामा भी दे चुका है। इसमें यह जानकारी दी गई कि जिले में जुगाड़ गाड़ी का परिचालन नहीं हो रहा है।
सरकार के आदेशानुसार जुगाड़ गाड़ी को लेकर अभियान चलाया जाएगा। पकड़े जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। शीघ्र ही इसके लिए टीम का गठन किया जाएगा।
कुमार सतेंद्र यादव, डीटीओ |
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