सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को मिलेगी जेईई-नीट की ऑनलाइन कोचिंग। सांकेतिक तस्वीर
रोहित कुमार, चंडीगढ़। सरकारी स्कूलों के छात्रों को देश के प्रमुख इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में प्रवेश के लिए तैयार करने के उद्देश्य से पंजाब सरकार एक नई पहल शुरू करने जा रही है। इसके तहत स्कूल आफ एमिनेंस और मेरिटोरियस स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा दसवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को जेईई मेन, जेईई एडवांस और नीट की ऑनलाइन तथा संवादात्मक कोचिंग दी जाएगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह कार्यक्रम सरकारी और निजी स्कूलों के छात्रों के बीच अवसरों की खाई को कम करने के लिए तैयार किया गया है। यह केवल आनलाइन कक्षाएं ही नहीं देगा, बल्कि एक पूरा अकादमिक सपोर्ट सिस्टम तैयार करेगा जिसमें संरचित कोचिंग, डाटा आधारित मूल्यांकन और तकनीक आधारित सहयोग शामिल होगा, ताकि अधिक से अधिक छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकें और साथ ही बोर्ड परीक्षा की तैयारी संतुलित और तनाव-मुक्त बनी रहे।
राज्य में 118 स्कूल आफ एमिनेंस और 10 मेरिटोरियस स्कूल हैं। मेरिटोरियस स्कूल अमृतसर, बठिंडा, फिरोज़पुर, गुरदासपुर, जालंधर, लुधियाना, मोहाली, पटियाला, संगरूर और तलवाड़ा में स्थित हैं। इन सभी स्कूलों में कुल 20,925 छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें 14,037 स्कूल आफ एमिनेंस और 6,888 मेरिटोरियस स्कूलों में हैं। इन स्कूलों में प्रवेश शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है।
इस योजना के तहत एक कोचिंग एजेंसी नियुक्त की जाएगी जो प्रत्येक छात्र के पूरे अकादमिक जीवनचक्र की जिम्मेदारी संभालेगी। इसमें जागरूकता अभियान, ब्रिज कोर्स, डायग्नोस्टिक स्क्रीनिंग, नियमित लाइव कोचिंग, डाउट समाधान, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और अंतिम परीक्षा की तैयारी शामिल होगी।
शुरुआत में सभी स्कूलों में ओरिएंटेशन वेबिनार और करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद कक्षा नौवीं और दसवीं के लिए तीन से चार सप्ताह का ब्रिज कोर्स चलाया जाएगा, विशेषकर ग्रामीण और प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थियों की बुनियाद मजबूत करने के लिए। इसके बाद केवल ब्रिज कोर्स पर आधारित एक स्क्रीनिंग टेस्ट लिया जाएगा।
कक्षा नौवीं और दसवीं के छात्रों के लिए प्रतिदिन डेढ़ घंटे की कक्षाएं होंगी, जबकि कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए प्रतिदिन दो डेढ़-डेढ़ घंटे के सत्र होंगे जिनमें भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित और जीव विज्ञान पढ़ाया जाएगा। बैच का आकार 150 तक सीमित रहेगा। सभी कक्षाएं रिकार्ड होकर 12 घंटे के भीतर अपलोड की जाएंगी और स्कूल उपस्थिति पर निगरानी रखेंगे।
छात्रों को ई-बुक, नोट्स, अवधारणा मानचित्र, हल किए गए उदाहरण और प्रश्न बैंक दिए जाएंगे। साप्ताहिक और मासिक परीक्षाएं, पूर्ण लंबाई मॉक टेस्ट, विषयवार विश्लेषण और कमजोरी मानचित्र तैयार किए जाएंगे। साल में दो बार 10 से 20 दिन के ग्रीष्म और शीतकालीन अकादमिक कैंप भी आयोजित किए जाएंगे। पूरी योजना की निगरानी के लिए रियल-टाइम डैशबोर्ड बनाए जाएंगे और प्रत्येक स्कूल में एक नोडल शिक्षक नियुक्त किया जाएगा ताकि समन्वय बना रहे। |