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रुद्रप्रयाग पहुंची कालीमठ की कालीमाई की देवरा यात्रा। जागरण
संवाद सहयोगी, जागरण, रुद्रप्रयाग: कालीमठ की प्रसिद्ध देवी कालीमाई की 15 वर्षों बाद निकल रही प्रथम चरण की देवरा यात्रा ने अगस्त्यमुनि सिल्ली में भक्तों को दर्शन देकर उनकी कुशलक्षेम पूछी।
इसके बाद यात्रा रामपुर, तिलवाड़ा होते हुए रुद्रप्रयाग पहुंचने पर कालीमाई की देवरा यात्रा का पुष्प एवं अक्षतों से जोरदार स्वागत हुआ। गुरुवार को देवरा यात्रा रुद्रप्रयाग शहर में ही रात्रि प्रवास करेगी। इसके बाद 14 जनवरी मकर संक्राति पर्व पर संगम स्थल देवप्रयाग में पहला स्नान करेगी। यात्रा के संग में चल रहे भक्तजनों के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
सात दिसंबर से सिद्धपीठ कालीमठ मंदिर से 15 वर्षों बाद मां कालीमाई की देवरा यात्रा की शुरूआत हुई थी। गुरुवार सुबह सिल्ली में पुजारी एवं वेदपाठियों ने मां काली की विशेष पूजा अर्चना कर भोग लगाया।
इसके बाद ठीक नौ बजे डोली ने भक्तों के जयकारों के साथ अपने अगले पड़ाव के लिए प्रस्थान किया। मां कालीमाई की डोली ने रामपुर, तिलवाड़ा समेत कई जगहों पर भक्तों को दर्शन दिए। इस दौरान भक्तों ने मां का पुष्प एवं अक्षतों से स्वागत किया। मां कालीमाई की डोली ने नृत्यकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। शहर में कालीमाई की डोली आगमन पर स्थानीय लोगों ने जोरदार स्वागत किया।
नगर पालिका पार्किंग के पास बदरी-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवान ने समिति की ओर से डोली का भव्य स्वागत किया। स्थानीय लोगों की मौजूदगी में डोली का फूल मालाओं से स्वागत हुआ।
उन्होंने कहा कि देवरा यात्रा उत्तराखंड की वर्षों पुरानी धार्मिक परम्परा है। इसके बाद देवी की डोली बाजार पहुंची, जहां भक्तों ने मां का आशीर्वाद लिया। डोली प्रभारी महेन्द्र सिंह, वीरेन्द्र सिंह, प्रबल सिंह, कुलदीप रावत समेत देवरा यात्रा में शामिल लोग नंगे पांव आगे बढ़ रहे हैं।
भ्रमण के दौरान भैरवनाथ एवं पांडवकाली देवता मां कालीमाई की अगुआई कर रहे हैं। मां काली गुरुवार को रात्रि विश्राम रुद्रप्रयाग में करेगी। इसके बाद डोली रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, मलेथा होते हुए 13 को देवप्रयाग पहुंचेगी तथा 14 जनवरी को मक्रर संक्राति पर्व पर प्रथम चरण के तहत देवप्रयाग में स्नान करेगी।
इस अवसर पर कालीमाई पंचगाई समिति कालीमठ के अध्यक्ष लखपत राणा, समिति के महामंत्री सुरेशानंद गौड, प्रबंधक बीकेटीसी प्रकाश पुरोहित, मठापति अब्बल सिंह राणा, प्रधान कालीमठ प्रदीप राणा, वेदपाठी रमेश भटट, भगवती देवशाली, कुंवर सिंह रावत, समिति के पदाधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
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