cy520520 • The day before yesterday 19:56 • views 851
अनुशासन तार-तार, विधायकों और मंत्रियों के बीच समन्वय की कमी।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के.राजू का प्रदेश कांग्रेस पर नियंत्रण कमजोर पड़ता दिख रहा है। एक बार फिर उनकी मौजूदगी में पार्टी लाइन से अलग जाकर वरिष्ठ विधायक ने अपनी राय सार्वजनिक मंच पर रखी। तेवर तल्ख थे और लहजा चेतावनी भरा था।
इससे कहीं ना कहीं अनुशासन कमजोर होता दिख रहा है। जो भी हो, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी की मौजूदगी में अनुशासन टूटने का यह लगातार दूसरा मामला है। इसके पूर्व मंत्री डा. इरफान अंसारी, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और विधायक ममता देवी के बीच तल्खी भरे लहजे में बातचीत और आरोप-प्रत्यारोप की बातें वीडियो में रिकार्ड हो चुकी हैं।
कोई ना कोई हंगामा कर देता
इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय महासचिव ने सभी पक्षों को आपसी समन्वय के साथ कांग्रेस के हित में काम करने का निर्देश दिया था। सुलह होने के बाद पेसा के लागू होते ही एक नई चिंगारी सुलग गई है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस में थोड़ी सी शांति होती है कि कोई ना कोई हंगामा कर देता है।
इस बार मचे हंगामा के पीछे सीनियर नेता और पूर्व वित्त मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव का नाम सामने आ रहा है। कथित तौर पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पेसा कानून की अनदेखी करते हुए नियमावली पारित करने को लेकर चेतावनी भरे लहजे में सतर्क कर दिया है।
कांग्रेस का स्टैंड कमजोर पड़ रहा?
इससे पेसा को लेकर भाजपा के आरोप अधिक पुख्ता होते दिख रहे हैं तो कांग्रेस का स्टैंड कमजोर पड़ रहा है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी की मौजूदगी में यह घटना हुई और इस बार सार्वजनिक मंच से आरोप लगाए गए। ऐसी घटनाओं से कहीं ना कहीं सरकार में कांग्रेस की पकड़ ढीली पड़ती जाएगी।
कई सीनियर नेता सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोल रहे हैं बल्कि कार्यकर्ताओं को भड़का रहे हैं। आनेवाले दिनों में कांग्रेस के लिए मुसीबतें निश्चित तौर पर बढ़ेंगी। |
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