योजना के तहत करीब 400 कलाकारों को विभिन्न शिल्प विधाओं में दक्ष बनाया जाएगा। फाइल फोटो
राजेश रंजन शशि, मधुबनी। Mithila Painting Training: मिथिला पेंटिंग समेत पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य के 10 जिलों में कलाकारों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण के दौरान कलाकारों को प्रतिदिन 300 रुपये का स्टाइपेंड भी मिलेगा। योजना के तहत करीब 400 कलाकारों को विभिन्न शिल्प विधाओं में दक्ष बनाया जाएगा।
दो महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण, बेगूसराय, सुपौल और किशनगंज जिलों का चयन किया गया है।
कुल 13 स्थानों पर प्रशिक्षण केंद्र संचालित होंगे। इसमें वही कलाकार शामिल होंगे जिनके पास हस्तशिल्प विभाग द्वारा जारी शिल्प पहचान पत्र (आई-कार्ड) है। सेमी-स्किल्ड और सामान्य कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान मिथिला पेंटिंग, सिक्की, सुजनी और टेराकोटा जैसी पारंपरिक कलाओं की बारीकियां सिखाई जाएंगी। साथ ही बाजार की मांग के अनुरूप शिल्प तैयार करने की तकनीक पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। सभी कलाकारों को निशुल्क टूल किट उपलब्ध कराई जाएगी।
हर प्रशिक्षण केंद्र पर दो-दो मास्टर ट्रेनर तैनात होंगे, जिन्हें 30 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। ये प्रशिक्षक राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित होंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन कार्यालय विकास आयुक्त, हस्तशिल्प कार्यालय, मधुबनी द्वारा किया जाएगा।
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कलाकार बौआ देवी ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से मिथिला पेंटिंग की मौलिकता बनी रहेगी। उन्होंने चिंता जताई कि नई पीढ़ी के कलाकार कोबर, भरनी, कचनी और गोदना जैसी पारंपरिक शैलियों से दूर होते जा रहे हैं।
सहायक निदेशक बीके झा ने बताया कि जिन जिलों में जिस शिल्प की प्रधानता है, वहां उसी विधा को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रशिक्षण इसी माह शुरू होने की संभावना है। |