प्रतीकात्मक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों पर खड़े कूड़े के पहाड़ से ठोस कचरा प्रबंधन में लापरवाही को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंभीर व तल्ख टिप्पणी की है। एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि दिल्ली का ठोस कचरा प्रबंधन जन-स्वास्थ्य आपातकाल को जन्म दे सकता है।
एनजीटी ने रिकाॅर्ड पर लिया कि 6 फरवरी 2023 को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को नियमित एवं सत्यापन योग्य प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिया गया था, लेकिन लंबे समय तक पालन नहीं किया गया। अंततः पांच दिसंबर 2025 को रिपोर्ट दाखिल की गई।
एनजीटी ने रिकाॅर्ड पर लिया कि दिल्ली में प्रतिदिन 11,000 टन से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जबकि केवल आठ हजार टन को ही उपचारित किया जाता है। वहीं, प्रतिदिन करीब 3,000 टन बिना उपचारित कचरा जमा हो रहा है। एनजीटी ने दिल्ली सरकार को मामले पर नियमित प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
दूसरी तरफ यमुना में प्रदूषण व सीवेज प्रबंधन के मुद्दे पर एनजीटी ने रिकाॅर्ड पर लिया कि नौ एसटीपी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं काम कर रहे हैं और यमुना नदी में विशेषकर वजीराबाद बैराज से असगरपुर गांव तक बिना उपचारित सीवेज का बहाव जारी है।
एनजीटी ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सीवेज उत्पादन एवं सीवर कनेक्टिविटी, नालों में बहने वाले सीवेज/औद्योगिक अपशिष्ट पर रिपोर्ट दाखिल करें।
एनजीटी ने एसटीपी की क्षमता, उपयोग एवं प्रदर्शन के साथ ही बरसाती नाले में सीवेज रोकने की समयबद्ध योजना पर भी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को यमुना नदी की जल गुणवत्ता से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता कात्यायनी व अधिवक्ता विक्रांत बडेसरा को मामले में सहायता के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया। मामले में अगली सुनवाई छह जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
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