आरएमआरआइ में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, पटना सिटी। बिहार से वर्ष 2023 में कालाजार का उन्मूलन हो चुका है। वर्ष 2027 के आरंभ तक बिहार पूरी तरह से कालाजार मुक्त हो जाएगा। इस दौरान कालाजार मरीज को लेकर ब्लाक स्तर पर हुए सर्वे, जांच, छिड़काव, इलाज, सहायता, समीक्षा आदि से जुड़े दस्तावेजों को एकत्र करने का काम होगा।
लगातार तीन वर्षों तक ब्लाक स्तर प्रति दस हजार व्यक्ति में एक मरीज सुनिश्चित होने के बाद राज्य एवं केंद्र सरकार के समन्वय से विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश को कालाजार मुक्त घोषित किया जाएगा। ये बातें बुधवार को अगमकुआं स्थित राजेंद्र स्मारक चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान के निदेशक डा. कृष्णा पांडेय और विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्टेट एनटीडी को आर्डिनेटर डा. राजेश पांडेय ने कही।
आरएमआरआइ में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए बिहार के 18 जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को दस्तावेजीकरण की तकनीक से अवगत कराया गया। स्वास्थ्य विभाग और पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समीक्षा बैठक में अररिया, अरवल, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, मुंगेर, पूर्णिया, सारण और सीतामढ़ी के जिलों के वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। साथ ही मुजफ्फरपुर स्थित केएएमआरसी के प्रतिनिधियों ने भी तकनीकी इनपुट साझा किए।
वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डा. एन के सिन्हा ने जिलों से आए अधिकारियों को कामिश पोर्टल पर डेटा की शत प्रतिशत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करनेका निर्देश दिया। |