प्रतीकात्मक फोटो
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। कोतवाली देहात थाना पुलिस ने नगर निगम के वार्ड आठ के पार्षद की फर्जी मुहर का उपयोग कर आधार कार्ड में पता परिवर्तन करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने दो जनसेवा केंद्र संचालकों को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से सरकारी पहचान पत्रों में छेड़छाड़ कर अवैध लाभ उठा रहे थे। आरोपित दो हजार रुपये में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के अलावा चरित्र प्रमाण पत्र भी बनाकर देते थे। चरित्र प्रमाण पत्र बनाने में नगर मजिस्ट्रेट के नाम की मुहर का उपयोग किया जाता था।
वार्ड आठ की निगम पार्षद निगहत जावेद ने छह जनवरी को कोतवाली देहात थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोग उनकी फर्जी मुहर का उपयोग कर आधार कार्ड में अवैध रूप से पता परिवर्तन कर रहे हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने बुधवार को हकीमपुरा रोड स्थित डीएवी स्कूल के पास एक जनसेवा केंद्र पर छापामारी की।
केंद्र संचालक रसूलपुर निवासी शमीम अहमद और उसके यहां काम करने वाला हकीमपुरा निवासी सुनील कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से तीन फर्जी मुहर बरामद की, जिनमें पार्षद निगहत के नाम की मुहर, इंडसइंड बैंक सहारनपुर की सीएसपी मुहर और एक जनसेवा केंद्र की शामिल है। इन मुहरों का उपयोग कर आधार कार्ड में पता परिवर्तन कर दस्तावेजों में हेराफेरी की जा रही थी। थानाध्यक्ष सुनील नागर ने बताया कि आरोपित सिटी मजिस्ट्रेट की फर्जी मुहर का भी इस्तेमाल कर प्रमाण पत्र बनाते थे।
ऐसे पकड़े गए आरोपित
मुजफ्फरनगर निवासी कृष्णपाल परिवार के साथ कुछ दिनों पहले हकीमपुरा में शिफ्ट हुए थे। आधार कार्ड में पता बदलवाने के लिए फार्म पर वार्ड आठ के पार्षद की मुहर लगनी थी। 30 दिसंबर को कृष्णपाल अपनी बेटी समेत चार सदस्यों के फार्म लेकर हकीमपुरा रोड स्थित डीएवी स्कूल के जनसेवा केंद्र पहुंचे। आरोपितों ने वार्ड पार्षद निगहत के नाम की मुहर लगा हस्ताक्षर कर दिए।
इस कार्य के लिए आरोपितों ने आठ सौ रुपये लिए थे। पता परिवर्तन कराने के लिए जब फार्म को लेकर कृष्णपाल रसूलपुर जनसेवा केंद्र पर पहुंचे, यहां केंद्र संचालक ने संदेह होने पर उनकी बेटी का फार्म कैंसिल कर दिया। कृष्णपाल फिर बेटी के फार्म पर हस्ताक्षर और मुहर लगाने के लिए पार्षद के पास पहुंचे। पार्षद ने फार्म पर मुहर लगाकर हस्ताक्षर कर दिए।
बाद में कृष्णपाल ने पांच सौ रुपये पार्षद को दिए। पार्षद ने कहा कि वह इस कार्य के रुपये नहीं लेतीं। कृष्णपाल ने बताया कि पहले फार्म पर हस्ताक्षर और मुहर लगाने के लिए आठ सौ रुपये दिए थे। बाद में जनसेवा केंद्र के आरोपितों के बारे में जानकारी मिली। |
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