पुरानी दिल्ली में बेतरतीब तरीके से किया गया अवैध निर्माण। जागरण आर्काइव
निहाल सिंह, नई दिल्ली। संसद भवन से मात्र साढ़े पांच किलोमीटर दूरी पर प्रसिद्ध रामलीला मैदान है। जो कि कई आंदोलनों और राजनीतिक घटनाक्रमों का गवाह रहा है। जहां पर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी बाजपेयी, मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न कार्यक्रमों को संबोधित किया है।
वहीं पर इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण अतिक्रमणकारियों और सरकारी अधिकारियों के गठजोड़ को दिखाता है। राजनीतिक संरक्षण में दिल्ली में अब भी अवैध निर्माण से लेकर अतिक्रमण केवल पुरानी दिल्ली में सीमित नहीं है बल्कि पूरी दिल्ली ही अवैध निर्माण और अतिक्रमण के ढेर पर खड़ी है। दिल्ली में दो हजार से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों इसका जीता-जागता उदाहरण है।
बुधवार को तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के समीप अतिक्रमण हटाता बुलडोजर। फोटो- चंद्र प्रकाश मिश्र
इन इलाकों में अवैध निर्माण का बोलबाला
एसटीएफ की रिपोर्ट के अनुसार रोहिणी, कटरा नील चांदनी चौक, करोल बाग,दरियागंज, किराणी सुलेमान नगर,बुराड़ी,पहाड़गंज, राजेंद्र नगर, जामिया नगर, ओखला, अबुल फजल एन्कलेव, मदनगीर,महरौली, बदरपुर, साकेत, मालवीय नगर, मुनिरिका, कबीर नगर,सीलमपुर, बाबरपुर जैसे इलाकों के अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामले चल रहे हैं।
तुर्कमान गेट के सामने तैनात पर पुलिसकर्मी। चंद्र प्रकाश मिश्र
इसमें किसी ने पार्क में निर्माण कर रखा है तो किसी ने अवैध निर्माण कर रखा है। लोग अवैध निर्माण को हटाने की लड़ाई सरकारी विभागों से लड़ रहे है। दिल्ली में अवैध निर्माण की स्थिति यह है कि पार्कों से लेकर रिहायशी क्षेत्रों और व्यावसायिक क्षेत्रों में अतिक्रमण सरकारी भूमि पर किया जाता रहा है और वह बदस्तूर जारी भी है। वहीं, बाहरी दिल्ली में तो अवैध रूप से कालोनियां काटी जा रही हैं।
अवैध निर्माण की मिलीं दो लाख 20 हजार 291 शिकायतें
अवैध निर्माण और अतिक्रमण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली में इसके निपटारे और निगरानी के लिए बनी स्पेशल टास्क फोर्स के पास ही एक हजार के करीब मामले वहीं लंबित हैं जो किसी न किसी कोर्ट में चल कार्रवाई के लिए चल रहे हैं।
तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास से हटाया गया अतिक्रमण। हरीश कुमार
इतना ही नहीं दिल्ली में अवैध निर्माण की स्थिति क्या है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि दो लाख से अधिक शिकायतें अवैध निर्माण की पिछले साल एसटीएफ के पास पहुंची।
एसटीएफ की रिपोर्ट के अनुसार दो लाख 20 हजार 291 शिकायतें अवैध निर्माण की आई। इसमें से मात्र 18655 संपत्तियों को ही बुक किया गया। जबकि 3158 संपत्तियों को कारण बताओ नोटिस और 186 पर सीलिंग की कार्रवाई हुई। 908 इमारतों को गिराया गया। 146046 शिकायतों को कार्रवाई योग्य नहीं माना गया।
वोट बैंक की वजह से नहीं होती है कार्रवाई
दिल्ली में अवैध निर्माण की बड़ी वजह राजनीतिक संरक्षण और इससे प्रभावित लोग वोट बैंक का हिस्सा होने की वजह से कार्रवाई नहीं हो पाती है। दिल्ली में अवैध कालोनियां है।
इन कॉलोनियों को गिराने से बचाने के लिए संसद से बार-बार स्पेशल प्रोविजन एक्ट की समय-सीमा बढ़ाई जाती है।
कार्रवाई न होने की बड़ी वजह है कि यहां पर रह रहे लोग समय-समय पर राजनीतिक दलों के वोट बैंक का हिस्सा रहे हैं इसलिए कोई भी राजनीतिक दल खुले तौर पर इन पर बड़ी कार्रवाई के लिए साथ खड़ा नहीं होता है।
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