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तोड़कर दोबारा बनेंगे खतरनाक नत्थू कॉलोनी फ्लाईओवर के दोनों केरिज-वे, तीन साल तक जनता को होगी परेशानी

Chikheang Yesterday 05:27 views 155
  

नत्थू कॉलोनी फ्लाईओवर पर लगा बैरियर । जागरण आर्काइव



वी के शुक्ला, नई दिल्ली। नत्थू कॉलोनी में बने जिस फ्लाईओवर पर सात साल से बसों सहित सभी बड़े वाहनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है, इसे अब फिर से बनाया जाएगा। इसकी सुरक्षा को लेकर कराई गई जांच में बड़े वाहनों के लिए यह फ्लाईओवर खतरनाक पाया गया है। जिसके चलते पिलर और गार्डर छोड़कर अन्य सभी काम फिर से होगा।

फ्लाईओवर के दोनों केरिज-वे तोड़कर फिर से बनाए जाएंगे। 125 करोड़ की लागत से अंडरपास सहित बने इस फ्लाईओवर पर साढ़े सात साल पहले यातायात शुरू हुआ था। यातायात शुरू होने के छह माह बाद ही इसके स्लैब गिरने लगे थे। जिसके बाद इसके ऊपर बड़े वाहनों के गुजरने पर प्रतिबंध लग गया था।

दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) ने इस फ्लाईओवर को लेकर आई रिपोर्ट के बाद लोक निर्माण विभाग को समन्वय बैठक के लिए पत्र लिखा है। जिसमें इसे पर काम किए जाने को लेकर फैसला लिया जाएगा।
2015-16 में बनाया गया था फ्लाईओवर

यहां बता दें कि उत्तर पूर्वी जिला में नंद नगरी की ओर से बाबरपुर आने जाने के लिए नत्थू कॉलोनी के पास लालबत्ती और रेलवे लाइन को कवर करते हुए इस पर 2015-16 में फ्लाईओवर बनाया गया था। डीटीटीडीसी ने बनाने के बाद 2017 में इसे रखरखाव के लिए पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया। इसके छह माह बाद ही इसके स्लैब गिरने लगे थे।
2018 में लगी थी बड़े वाहनों के गुजरने पर रोक

फ्लाईओवर की मरम्मत करा दी गई और इसे चालू कर दिया गया। मगर पीडब्यूडी ने इसे बड़े वाहनों के चलने के उपयुक्त नहीं माना और 2018 में बैरियर लगाकर इसके ऊपर से बड़े वाहन गुजरने पर रोक लगा दी थी जो अब तक लगी हुई है। लगातार मामला उठाने के बाद भी जब इसे लेकर कोई गतिविधि आगे नहीं बढ़ी तो इलाके के भाजपा विधायक जितेंद्र महाजन इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में ले गए।

कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की सलाह दी जिस पर अधिकारियों में कुछ हलचल हुई। जिसके बाद डीटीटीडीसी के अनुरोध पर गत अप्रैल से मई में नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की तकनीकी टीम ने बी एंड एस इंजीनियरिंग कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से सीमेंट-कंक्रीट के ब्लाक रखकर फ्लाईओवर की लोड टेस्टिंग कराई थी।

अब इस बारे में तैयार की गई अंतिम रिपोर्ट में डेक स्लैब पैनल को लेकर सलाह दी गई है कि इस फ्लाईओवर के पूरे प्रीकास्ट डेक सिस्टम को हटा दिया जाए और उसकी जगह कास्ट-इन-सीटू रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट डेक स्लैब बनाए जाएं। इस तकनीक से मौके पर ही स्लैब बनाते हुए आगे बढ़ा जाता है।
तीन साल तक जनता को झेलनी पड़ेगी परेशानी

दिल्ली मेट्रो में अधिकतर काम इसी तकनकी से पूरा किया गया है। माना जा रहा है कि इस फ्लाईओवर तो तोड़ने में एक से डेढ़ साल और इसे फिर से बनाने में भी एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है। यानी कुल मिलाकर तीन साल तक इस इलाके की जनता की परेशानी रहने वाली है।

महाजन कहते हैं कि पिछले सात साल से बड़े वाहनों के फ्लाईओवर पर प्रतिबंध से इलाके की जनता परेशान है और इसे फिर से बनाने पर तीन साल और जनता परेशान होगी, इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

वह कहते हैं कि इसे बनाने में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है मगर आज तक न ही बनाने वाली कंपनी और न ही किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई है। इसे बनाने वाली गैमन इंडिया का भी अधिकतर भुगतान हो चुका है। उन्होंने इसे लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र भी लिखा है।
महत्वपूर्ण तथ्य

  • इस फ्लाईओवर में 20 पिलर हैं
  • एक पिलर से दूसरे पिलर के बीच स्पैन में 28 स्लैब हैं
  • एक स्लैब की चौड़ाई साढ़े सात मीटर और लंबाई ढाई मीटर है।
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