छात्र की मौत के बाद गांव में जांच क़रतीं पुलिस और रामशरण का फाइल फोटो
संवाद सूत्र, नूरपुर पिनौनी (बदायूं)। हंसता-खेलता रामशरण घर से खाना खाकर निकला मगर, इसके बाद जो हुआ, वो रहस्य से कम नहीं है। पांचवीं में पढ़ने वाले 12 वर्षीय उस छात्र का शव सोमवार रात को एसआरएस स्कूल के क्लासरूम में फंदे से लटका मिला। शव देखकर स्वजन ने अंदेशा जताया कि उसकी हत्या की गई मगर, वे भी समझ नहीं पा रहे थे कि कोई ऐसा क्यों करेगा।
परिवार की किसी से रंजिश, न शव इस अवस्था में मिला कि अमानवीय कृत्य के संकेत होते। दूसरी ओर, पुलिस ने जांच की तो फंदा बनाने का तरीका, पैरों के पास रखी मेज आत्महत्या की ओर इशारा कर रही थी। इस तर्क पर भी सवाल था कि 12 वर्ष का बालक ऐसा क्यों करेगा। अब उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा, ताकि सवालों के जवाब तलाशे जा सकें।
नूरपुर पिनौनी निवासी आढ़ती ओमकार का 12 वर्षीय बेटा रामशरण गांव के ही उम्मेद सिंह जूनियर हाईस्कूल में पढ़ता था। स्वजन के अनुसार, दोपहर दो बजे स्कूल से आकर उसने खाया खाया, इसके बाद कहीं चला गया। शाम सात बजे तक वह लौटकर नहीं आया तो पिता को चिंता हुई। वह गांव में तलाशते रहे परंतु, कोई सुराग नहीं लगा।
रात आठ बजे गांव के एक बच्चे ने बताया कि रामशरण का शव घर के पीछे निर्माणाधीन एसआरएस पब्लिक स्कूल में फंदे से लटका है। स्वजन तुरंत वहां पहुंचे और रामशरण को फंदे से उतारकर इस्लामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए मगर, चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, एसआरएस स्कूल के मुख्य द्वार एवं कमरों में अभी दरवाजे नहीं लगे हैं।
स्कूल प्रबंधन ने इसी सत्र से प्रवेश शुरू किए, इसलिए छात्रों की संख्या भी नहीं है। दोपहर 12 बजे कुछ प्रवेश करने के बाद शिक्षक वहां से चले गए। घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने देखा कि रस्सी के एक सिरे में लकड़ी का टुकड़ा बांधकर रोशनदान के पीछे डालकर फंसाया गया था। संभवता, 10 फीट ऊंचे रोशनदान तक नहीं पहुंचने की स्थिति में इस तरह की जुगत की गई।
इसके बाद दूसरे सिरे में फंदा बनाने के बाद छात्र क्लासरूम में रखी मेज पर चढ़ा, फिर लटक गया। फोरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य जुटाए। आरंभिक जांच के बाद उसके स्वजन पोस्टमार्टम से इन्कार करने लगे। पिता ने कहा कि जांच करा लें मगर, कोई निर्दोष न फंसे। इस्लामनगर थाना प्रभारी उदयवीर सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया आत्महत्या प्रतीत हो रही। छात्र की चप्पलें मेज के पास थीं, गले पर निशान भी था।
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