विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को बिहार जेल मैनुअल, 2012 में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया को नौ माह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश सुधीर सिंह एवं न्यायाधीश राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता अभिनव शांडिल्य द्वारा दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
याचिका में भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा तैयार माडल प्रिजन मैनुअल, 2016 को बिहार में लागू करने की मांग की गई थी, ताकि देशभर में जेल नियमों में एकरूपता लाई जा सके। अधिवक्ता शांडिल्य ने अदालत को बताया कि अधिकांश राज्यों ने इस मैनुअल को पहले ही अपनाकर जेल सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, जबकि बिहार में नौ वर्षों बाद भी यह केवल कागजों तक सीमित है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में प्रिजन मैनुअल में आंशिक संशोधन अवश्य किया, जिसके आधार पर पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई हुई, किंतु संपूर्ण माडल प्रिजन मैनुअल को लागू करने से राज्य अब भी बचता रहा है। राज्य सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र में अदालत को बताया गया कि बिहार इंस्टीट्यूट आफ करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा सुझाए गए संशोधनों को शामिल करने के लिए मुख्यालय स्तर पर समिति का गठन किया गया है।
एक सदस्य के सेवानिवृत्त होने के बाद समिति का पुनर्गठन भी किया गया और इस दिशा में कई बैठकों का आयोजन हो चुका है। फिलहाल मामला विचाराधीन बताया गया। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और राज्य की दलीलों पर विचार करते हुए निर्देश दिया कि पूरी प्रक्रिया को आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से नौ माह के भीतर पूर्ण किया जाए।
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