हर जिले में अभियोजन निदेशालय, नए पदों का सृजन
राज्य ब्यूरो, पटना। गृह विभाग ने लंबित कांडों के निष्पादन के लिए हर जिले में अभियोजन निदेशालय का गठन किया है। इसके साथ ही नए सिरे से मुख्यालय से लेकर जिला व अनुमंडलों तक अभियोजन पदाधिकारियों तक के पद सृजित किए गए हैं। अब अभियोजन इकाइयों में कुल 2011 लोक अभियोजक हो जाएंगे।
राज्य में अब मुख्य अभियोजक के 38, अपर मुख्य अभियोजक के 272, सहायक अभियोजक के 460 और अभियोजन पदाधिकारी के 1223 पद होंगे। अभी जिला अभियोजन निदेशालयों के कार्यालय सेटअप और पदों पर बहाली की प्रक्रिया चल रही है। अगले साल मार्च तक जिलों में अभियोजन निदेशालय का काम शुरू होने की उम्मीद है।
गृह विभाग के अनुसर, राज्य में पूर्व से अभियोजन पदाधिकारी के 1440 पद सृजित है। इनके अलावा नये पदों का सृजन करते हुए अभियोजन इकाइयों का पुनर्गठन किया गया है। नए आवंटन में पटना जिला व इसके अनुमंडलीय कार्यालयों के लिए सबसे अधिक 206 अभियोजन पदाधिकारी मिले हैं।
पटना के बाद पूर्वी चंपारण में सबसे अधिक 88, मुजफ्फरपुर में 87, गया जी में 81, सारण में 80, बेगूसराय में 75, पश्चिम चंपारण व समस्तीपुर में 67-67, भागलपुर में 62 और दरभंगा-रोहतास में 60-60 अभियोजकों की तैनाती हो सकेगी।
मुख्यालय स्तर पर गृह विभाग के अभियोजन निदेशालय को 20, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को 12, ईओयू, गृह विभाग के विधि कोषांग और बिपार्ड को पांच-पांच अभियोजन पदाधिकारी दिए गये हैं। मालूम हो कि न्यायालयों में लंबित कांडों के जल्द निष्पादन को लेकर अभियोजन पदाधिकारी सरकार की तरफ से चार्जशीट से लेकर मुकदमों की पैरवी, साक्ष्य प्रबंधन आदि का काम करते हैं। |