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IBPS क्लर्क भर्ती में फर्जीवाड़ा : डमी कैंडिडेट बैठाकर पाई बैंक नौकरी, बायोमेट्रिक सत्यापन से खुला राज, SBI अधिकारी समेत दो गिरफ्तार

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ग्रे कलर की शर्ट में आरोपी शुभम गुप्ता सफेद शर्ट में राकेश मीणा।



डिजिटल डेस्क, इंदौर। देश की प्रतिष्ठित बैंक भर्ती प्रक्रिया आईबीपीएस (IBPS) क्लर्क परीक्षा में फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। वर्षों तक योजनाबद्ध तरीके से दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाकर बैंक की नौकरी हासिल की जा रही थी। इस संगठित घोटाले का पर्दाफाश धार में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के दौरान हुआ, जिसके बाद एक बैंक अधिकारी और एक क्लर्क को गिरफ्तार किया गया है, जबकि फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाला एक क्लर्क फिलहाल फरार है।

यह मामला 6 जनवरी को थाना नौगांव में दर्ज किया गया। फरियादी अरुण कुमार जैन, उप आंचलिक प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया धार ने लिखित शिकायत में बताया कि वर्ष 2022 और 2024 में IBPS क्लर्क भर्ती परीक्षा के माध्यम से पंकज मीणा और राकेश मीणा की नियुक्ति हुई थी। दोनों क्रमशः बैंक ऑफ इंडिया की अंजड़ (बड़वानी) और बांगड़दा (खरगोन) शाखा में पदस्थ थे।

6 जनवरी को दोनों कर्मचारियों को आंचलिक कार्यालय धार में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था।
पंकज मीणा बनकर पहुंचा शुभम गुप्ता

वेरिफिकेशन के दौरान पंकज मीणा की जगह एक अन्य युवक उपस्थित हुआ, जिसकी शक्ल बैंक रिकॉर्ड में दर्ज फोटो से मेल नहीं खा रही थी। संदेह होने पर जब उससे पूछताछ की गई तो उसने पहले खुद को पंकज मीणा बताया, लेकिन बाद में कार्यालय से भागने की कोशिश करने लगा। उसे पकड़कर पूछताछ करने पर उसने अपना असली नाम शुभम गुप्ता, निवासी सिरसा (हरियाणा) बताया।

जांच में सामने आया कि शुभम गुप्ता एसबीआई, हिसार में बैंक मैनेजर के पद पर पदस्थ है। उसने स्वीकार किया कि उसने पंकज मीणा और राकेश मीणा के नाम से आवेदन पत्रों में फोटो एडिटिंग कर स्वयं परीक्षा दी थी। इसी तरह डमी कैंडिडेट के जरिए क्लर्क पद पर नियुक्ति दिलाई गई।

शुभम के बयान के आधार पर बैंक अधिकारियों ने क्लर्क राकेश मीणा को भी धार बुलाया, लेकिन वह भी बायोमेट्रिक जांच में फर्जी पाया गया। इसके बाद थाना नौगांव पुलिस ने शुभम गुप्ता और राकेश मीणा को गिरफ्तार कर लिया।

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6 से 8 लाख रुपए में होती थी डील

नौगांव थाना प्रभारी हीरू सिंह रावत के अनुसार, पूछताछ में आरोपितों ने कबूल किया कि वे अपने साथी रूकाम मीणा (निवासी करौली, राजस्थान) के साथ मिलकर वर्ष 2021-22 से यह गिरोह चला रहे थे। वे दूसरे अभ्यर्थियों के नाम पर आवेदन करते, फोटो एडिटिंग कर किसी अन्य व्यक्ति से परीक्षा दिलवाते और चयन होने पर 6 से 8 लाख रुपए तक की रकम वसूलते थे।

पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े कुछ लोग वर्तमान में बैंक में सहायक प्रबंधक और क्लर्क जैसे पदों पर पदस्थ हैं। आरोपितों के कब्जे से मोबाइल फोन और अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं। दोनों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जबकि फरार आरोपी पंकज मीणा की तलाश जारी है।
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