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यूपी के गन्ना किसानों ने ये गलती कर दी तो सीधे होगी जेल, दूसरे प्रदेश से बीज लाने वाले जरूर दें ध्यान

Chikheang 2026-1-7 19:57:13 views 1105
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रमाणित बीजों के नाम पर दूसरी प्रजातियों को बीच का विक्रय करने वाले और मानकों का पालन न करने वाले गन्ना बीज उत्पादकों पर विभाग ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के बड़ी कार्रवाई की। 2230 बीज उत्पादकों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है।

अन्य सभी उत्पादकाें को बीज अधिनियम-1966 के सभी मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बाह्य स्रोत यानी दूसरे प्रदेशों या किसी अन्य देश से लाई गई बीज सामग्री को प्रदेश में उपयोग किए जाने पर क्वारंटाइन नियम का कड़ाई से अनुपालन कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए है। ऐसे बीज आदि के उपयोग के लिए विभागीय अनुमति अनिवार्य होगी।

गन्ना विकास विभाग में बीज गन्ना उत्पादक के रूप में 2823 किसान पंजीकृत थे। पिछले दिनों इंटरनेट मीडिया पर गन्ना की स्वीकृत प्रजातियों के नाम अन्य व प्रतिबंधित प्रजातियों के बीज विक्रय की शिकायतें मिली थीं। जिसके बाद विभाग ने सभी बीज उत्पादकों के सत्यापन के निर्देश दिए थे। इस दौरान 593 बीज उत्पादकों का पंजीकरण वैध पाया गया है, शेष के पंजीकरण निरस्त कर दिए गए हैं।

गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. ने बताया कि प्रदेश में प्रामाणिक बीज गन्ना उत्पादन एवं वितरण के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। बीज गन्ना उत्पादन व विक्रय करने के इच्छुक गन्ना किसान अपना आवेदन नजदीक के गन्ना विकास परिषद में प्रस्तुत करेगें। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक द्वारा निर्धारित समयावधि में इसका सत्यापन किया जाएगा।

उप गन्ना आयुक्त से प्राप्त संस्तुति पर गन्ना आयुक्त के स्तर से पंजीकरण की प्रकिया पूर्ण की जाएगी। किसानों को आवेदन पत्र के साथ कुल धारित कृषि योग्य भूमि, गन्ना क्षेत्रफल, अपने प्रक्षेत्र पर उत्पादित की जाने वाली गन्ना किस्म, उत्पादित सीडलिंग की संख्या, बीज फसल के लिए बीज प्राप्त करने के स्रोत आदि का विवरण देना होगा।

साथ में यह स्वघोषणा पत्र भी देना होगा कि कोई शिकायत मिलने पर खुद के विरुद्ध बीज अधिनियम 1966 के अनुसार कार्यवाही के लिए गन्ना विकास विभाग पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगा। पंजीकृत उत्पादकों द्वारा प्रदेश में स्वीकृत गन्ना किस्मों का ही बीज गन्ना संवर्धन एवं वितरण किया जाएगा। सीड एक्ट का उल्लंघन करने पर एक हजार रुपये का अर्थदंड और छह माह के कारावास की सजा का प्रविधान है।
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