पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट एक बहुचर्चित और गंभीर नार्को-आतंकवाद मामले में आरोपित अमित गंभीर को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रिकार्ड पर मौजूद साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि आरोपित की भूमिका केवल मादक पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह ऐसे कृत्यों की श्रृंखला में शामिल रहा, जिनसे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को गंभीर खतरा पहुंचा।
जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि जांच के दौरान सामने आए डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन यह स्थापित करते हैं कि आरोपित ने हवाला नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध धनराशि को विदेश भेजने में सक्रिय भूमिका निभाई। अदालत ने माना कि यह मामला साधारण आर्थिक अपराध का नहीं, बल्कि नार्को-टेररिज्म का है, जहां नशीले पदार्थों से अर्जित धन का इस्तेमाल सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को पोषित करने के लिए किया गया।
हाई कोर्ट ने रिकार्ड का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन के अनुसार, अमित गंभीर ने सह-आरोपी शेरा के कहने पर चार करोड़ रुपये से अधिक की हवाला ट्रांजैक्शन को अंजाम दिया। भारतीय मुद्रा को दिरहम में परिवर्तित कर दुबई स्थित मनी एक्सचेंज एजेंसियों तक पहुंचाया गया।एनआईए द्वारा आरोपित के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच में हवाला लेनदेन से जुड़ी ठोस सामग्री सामने आई है।
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जांच में धीमी गति पर चिंता व्यक्त
हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले में धीमी गति पर चिंता भी जताई। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा सूचीबद्ध 248 गवाहों में से अब तक केवल 11 गवाहों के बयान दर्ज हो सके हैं, जबकि 237 गवाहों का परीक्षण अभी शेष है। इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मामले की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
यह मामला जून 2019 का है, जब अमृतसर स्थित अटारी पर कस्टम अधिकारियों ने पाकिस्तान से आए एक ट्रक को रोका था। कागजों में खेप को राक साल्ट (सेंधा नमक) बताया गया था, लेकिन जांच के दौरान बोरियों में छिपाकर रखी गई 532 किलोग्राम हेरोइन और 52 किलोग्राम मिश्रित मादक पदार्थ बरामद हुए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब हजारों करोड़ रुपये आंकी गई।
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एनआईए कर रही जांच
इतनी बड़ी बरामदगी के बाद गृह मंत्रालय ने जांच को एनआईए को सौंप दिया। एनआईए ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। जांच में पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जुड़ी एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें नशीले पदार्थों की कमाई को अवैध हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजा जा रहा था।
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने जमानत की मांग को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि आरोपित की भूमिका, उपलब्ध साक्ष्य और अपराध की प्रकृति को देखते हुए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और नरमी बरतना न्याय के हित में नहीं होगा।
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