श्रीराम वन गमन पथ यात्रा की जानकारी देते सोलो राइडर (रेड कैप) डॉ. मुकेश चौहान। साथ हैं महंत योगेश पुरी, भगत सिंह बघेल, मनोज जादौन व अन्य।
जागरण संवाददाता, आगरा। सदियों के संघर्ष के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अयोध्या में भव्य मंदिर में विराजित हुए हैं। 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान श्रीराम जिन स्थानों पर गए, इतिहास में वे दर्ज तो हैं लेकिन वर्तमान दौर में उनमें से कई आज भी अनछुए हैं। उनको लेकर तमाम जिज्ञासाएं हैं।
श्रीराम के जीवन, आदर्शों और उनके 14 वर्षों के वनवास मार्ग को अनुभव करने के उद्देश्य से आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक एकल मोटरसाइकिल यात्रा “श्रीराम वन गमन पथ राइड” की औपचारिक घोषणा की गई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी ने शुभकामना पत्र प्रेषित किया है।
इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं आगरा के प्रसिद्ध बाइक राइडर, ट्रैवल व्लॉगर एवं यूट्यूब चैनल “Solo Explorer” के संचालक डॉ. मुकेश चौहान। दयालबाग निवासी डॉ. मुकेश चौहान ने बताया यह यात्रा न केवल एक राइड है, बल्कि भारतीय संस्कृति, रामायण कालीन स्थलों और सनातन परंपराओं को जीवंत रूप में समझने का एक विनम्र प्रयास है।
इससे पहले भी वे लगभग देश का तीन चौथाई भाग के प्रमुख स्थानों की सड़क मार्ग से यात्रा कर चुके हैं और लगभग 30 साल से अकेले बाइक से राइड करने का अनुभव है। श्रीराम वन गमन पथ में देश के आठ राज्यों के अलावा श्रीलंका भी शामिल रहेगा। करीब 75 दिन की अवधि में कुल 20 हजार किलोमीटर की यात्रा बुलट बाइक से पूर्ण की जाएगी।
डॉ. मुकेश चौहान के साथ डॉ. बीएस चौहान, डॉ. सीपी गुप्ता चित्रकूट तक यात्रा करेंगे। पत्रकार वार्ता के दौरान श्री मनःकामेश्वर मन्दिर के महंत श्री योगेश पुरी, यात्रा संरक्षक डॉ. मुकेश गोयल, रोटरी क्लब ऑफ आगरा डिवाइन के अध्यक्ष डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. शरद गुप्ता, भावना ग्रुप के एमडी भगत सिंह बघेल, आगरा रॉयल्स के निदेशक मनाेज जादौन, डॉ. सुमंत सिंह, अमित अग्रवाल, नवीन अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
यात्रा का शुभारंभ
16 जनवरी 2026 को प्रातः 11 बजे सेठ पदम चंद जैन इंस्टिट्यूट, डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय खंडारी कैंपस आगरा से यात्रा प्रारंभ होगी। तथा 18 जनवरी 2026 को भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या से हनुमान गढ़ी में राम भक्त हनुमान जी के आशीर्वाद के साथ विधिवत रूप से श्रीराम वन गमन पथ पर आगे बढ़ेगी।
यात्रा के प्रमुख उद्देश्य
- रामायण में वर्णित श्रीराम के वनवास मार्ग से जुड़े पवित्र स्थलों का दर्शन
- भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और ऐतिहासिक मार्गों का अध्ययन
- स्थानीय जनमानस से संवाद कर रामायण से जुड़ी लोककथाओं और परंपराओं को जानना
- आने वाली पीढ़ी और युवाओं में सनातन संस्कृति, धर्म, मर्यादा और इतिहास के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना
यात्रा की विशेषता
- कुल अवधि: लगभग 75 दिन
- कुल दूरी: लगभग 20,000 किलोमीटर
- यात्रा माध्यम: Royal Enfield Interceptor 650
- यात्रा स्वरूप: आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं साहसिक
प्रमुख रूप से निम्न स्थान शामिल होंगे
- अयोध्या
- प्रयागराज / श्रृंगवेरपुर
- चित्रकूट
- दंडकारण्य क्षेत्र
- नाशिक (पंचवटी)
- किष्किंधा क्षेत्र (हनुमंतगढ़ी)
- रामेश्वरम
- लंका धाम दिशा की ओर
इनके अतिरिक्त, तुलसीकृत रामचरितमानस और वाल्मीकि कृत रामायण सहित अनेक पुस्तकों के अध्ययन एवं महीनों के शोध के बाद लगभग 200 से अधिक रामायण कालीन स्थलों को इस यात्रा में सम्मिलित किया गया है। जो उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश तक में स्थित हैं।
आगरा से की गईं प्रमुख सोलो बाइक राइड
- लद्दाख (तीन बार)
- स्पीति वैली (तीन बार)
- कश्मीर, कारगिल
- नीति वैली, उर्गम वैली, ओम पर्वत, आदि कैलाश
- विश्व का सबसे ऊँचा मोटरेबल उमलिंग ला पास
- कन्याकुमारी, रामेश्वरम, धनुष्कोड़ी
- रन ऑफ़ कच्छ (गुजरात)
- दमन
- मुंबई, वेस्टर्न घाट
धार्मिक यात्राएं
- देश के चार धाम (रामेश्वरम, द्वारिका, जगन्नाथपुरी और बद्रीनाथ)
- उत्तराखंड के चार धाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री)
- सप्तपुरी (अयोध्या, हरिद्वार, मथुरा, काशी, उज्जैन,कांचीपुरम और द्वारिका)
- पंचभूत तत्व शिव मंदिर (प्रथ्वी-कांचीपुरम, जल-त्रिचिरापल्ली, अग्नि-तिरुवन्नामलाई, आकाश-चिदंबरम और वायु-श्रीकालहस्ती) सहित 11 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन।
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