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पढ़ेगा परिवार, बढ़ेगा शहर: अब बच्चे और माता-पिता साथ जाएंगे स्कूल, नए सत्र से साक्षरता का नया मॉडल लागू

cy520520 2026-1-7 14:56:41 views 311
  


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। जमशेदपुर में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति आने वाली है। अब सरकारी स्कूलों में सिर्फ बच्चों के बस्ते ही नहीं चमकेंगे, बल्कि उनके माता-पिता भी किताबों के साथ नजर आएंगे। पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने अभिभावकों को साक्षर बनाने के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की है।   झारखंड के जमशेदपुर में शिक्षा का दायरा अब बच्चों तक सीमित नहीं रहेगा। सत्र 2026-27 से जिले के सरकारी स्कूलों में एक अनोखी पहल शुरू होने जा रही है।    अब माता-पिता भी अपने बच्चों के साथ स्कूल जाएंगे। साक्षर भारत और हुलास योजना के तहत शुरू हो रही इस पहल का मकसद है पूरे परिवार को साक्षर बनाना, ताकि ज्ञान की रोशनी हर घर तक पहुंच सके।   
अप्रैल 2026 से शुरू होगा नया अभियान शिक्षा विभाग ने इस योजना को अप्रैल 2026 से लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्राइमरी, मिडिल और हाई स्कूलों में सोमवार से शनिवार तक हर दिन एक घंटे की कक्षाएं होंगी, जिनमें अभिभावकों को बुनियादी साक्षरता और गणित की शिक्षा दी जाएगी।    शिक्षक माता-पिता को हिंदी अक्षर, शब्द ज्ञान और हस्ताक्षर करना सिखाएंगे, ताकि वे अंगूठा लगाने के बजाय आत्मनिर्भर होकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर सकें।   गणित की कक्षाओं में उन्हें जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे बुनियादी विषयों की समझ दी जाएगी, जिससे वे दैनिक जीवन जैसे बाजार, बैंक या घर के खर्च की गणना आसानी से कर सकें।   
अभिभावकों की पहचान का काम शुरू इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। नए सत्र के नामांकन के समय शिक्षक ऐसे अभिभावकों की पहचान कर रहे हैं, जो निरक्षर हैं या जिन्हें अक्षर ज्ञान की आवश्यकता है।    प्रत्येक स्कूल को अपने क्षेत्र से कम से कम 15 अभिभावकों को चिन्हित करने का लक्ष्य दिया गया है, जिन्हें इस सत्र में साक्षरता कक्षाओं में शामिल किया जाएगा।   
लैंगिक समानता पर विशेष ध्यान यह योजना सिर्फ माताओं तक सीमित नहीं रहेगी। कक्षाएं पिताओं के लिए भी खुली रहेंगी ताकि पूरे परिवार में साक्षरता का माहौल बन सके।  विभाग का मानना है कि जब माता-पिता पढ़े-लिखे होंगे, तो बच्चों की पढ़ाई और बेहतर होगी।    इस तरह यह पहल साक्षरता के साथ-साथ लैंगिक समानता और सामाजिक भागीदारी की दिशा में भी कदम है। सीखने का मूल्यांकन और सम्मान अभियान में केवल शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि मूल्यांकन की भी व्यवस्था रहेगी।    पूरे सत्र के दौरान अभिभावकों की छोटी-छोटी परीक्षाएं ली जाएंगी ताकि यह समझा जा सके कि उन्होंने कितना सीखा है। वर्ष के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले माता-पिता को सम्मानित किया जाएगा। इसका उद्देश्य साक्षरता के साथ आत्मविश्वास बढ़ाना और घर में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना है।   
पूर्ण साक्षरता की ओर कदम शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह मॉडल जमशेदपुर को पूर्ण साक्षर जिला बनाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा। इससे उन परिवारों तक शिक्षा पहुंचेगी जो अब तक स्कूलों से दूर रहे हैं।    योजना का संदेश साफ है कि साक्षरता सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि हर उस वयस्क के लिए है जो सीखना चाहता है। यह पहल न सिर्फ किताबों का ज्ञान देगी, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर और आत्मसम्मानी बनने की राह पर भी आगे बढ़ाएगी।
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