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जमीन के विवाद के चलते तीन दिन तक पड़ा रहा मजदूर का शव। साकेतिक तस्वीर
संवाद सूत्र, पिपराइच। गांव की पंचायत ने एक ऐसा काम किया कि वह मिशाल बन गया। मामला बेला कांटा गांव का है। कोर्ट व थाना गए बिना मामला होने की चर्चा होने लगी है। असली को हक दिलाते हुए गांव के लोगों ने तीन दिन से मृत पड़े मजदूर का दाह संस्कार करा दिया।
ग्रामीणों के अनुसार मोदी निषाद की शादी कलमी देवी से हुई। वह अपने पहले पति के बेटे को साथ लेकर मोदी के घर आई थीं। यहां उनकी दो संतान हुई। बड़े बेटे छोटेलाल की आठ वर्ष पूर्व बीमारी से मृत्यु हो गई।
आरोप है कि इस बीच कलमी देवी ने साजिश के तहत पैतृक भूमि का बंटवारा कर पहले पति के बेटे श्रीकुमार व बेटी विलायती देवी के नाम जमीन बैनामा करा लिया। रविवार को मोदी की मृत्यु के बाद दाह संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। सोमवार को पंचायत बुलाई गई। इसमें सर्वसम्मति से फैसला हुआ कि पैतृक संपत्ति का वास्तविक हकदार स्वर्गीय छोटेलाल का परिवार है। छोटेलाल की पत्नी शांति अपने तीन बच्चों के साथ मजदूरी कर जीवन यापन कर रही है।
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पंचायत के निर्णय के बाद मंगलवार को श्रीकुमार व विलायती देवी ने अपने हिस्से की दो-दो कठ्ठा जमीन का बैनामा कमलावती देवी को कर दिया। ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर मृतक का अंतिम संस्कार कराया। मुखाग्नि पोता राकेश निषाद ने दिया। पंचायत में ग्राम प्रधान शैलेश सिंह व अन्य की अहम भूमिका रही। |
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