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झारखंड में बाल-विवाह की दर चिंताजनक, आंकड़े दे रहे चेतावनी; शिक्षा परियोजना परिषद ने स्कूलों को भेजा पत्र

LHC0088 2026-1-7 04:56:13 views 795
  

झारखंड में बाल विवाह दर राष्ट्रीय औसत से अधिक। (प्रतीकात्मक फोटो)  



जागरण संवाददाता, धनबाद। Child Marriage Rate in Jharkhand Alarming: बाल-विवाह की बढ़ती चुनौती को देखते हुए भारत सरकार ने इसे जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से बाल-विवाह मुक्त भारत–100 दिवसीय अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत झारखंड के सभी विद्यालयों में 10 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि एनएफएचएस-5 (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण) के अनुसार राज्य में अब भी बाल-विवाह की दर 32 प्रतिशत से अधिक है। यह राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।

इसी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए विद्यालय स्तर पर छात्रों, अभिभावकों और समुदाय को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी विशेष कारणवश निर्धारित तिथि पर गतिविधि आयोजित नहीं हो पाती है, तो उसे सुविधानुसार अन्य तिथि पर अनिवार्य रूप से संपन्न कराया जाए।

सभी गतिविधियों से संबंधित प्रतिवेदन एवं फोटोग्राफ को बाल-विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा अधीक्षक को सौंपी गई है। शिक्षा विभाग का मानना है कि विद्यालयों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाकर ही बाल-विवाह जैसी कुरीति को समाप्त किया जा सकता है।
तिथिवार कार्यक्रम विवरण

10 जनवरी : विद्यालयों में बाल-विवाह उन्मूलन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम तथा बाल-विवाह मुक्त भारत शपथ समारोह का आयोजन।

15 जनवरी : विद्यालय के पोषक क्षेत्र में बच्चों द्वारा बाल-विवाह उन्मूलन संबंधी स्लोगनों के साथ प्रभात फेरी का आयोजन।

19–20 जनवरी : वाद-विवाद, निबंध लेखन, चित्रकला आदि रचनात्मक एवं सहभागितापूर्ण गतिविधियों का आयोजन।

22 जनवरी : बच्चों द्वारा बाल-विवाह उन्मूलन पर आधारित नुक्कड़ नाटक का मंचन।

27 जनवरी : विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक, बाल-विवाह उन्मूलन विषय पर चर्चा तथा शपथ ग्रहण।
क्या है बाल विवाह मुक्त भारत अभियान

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए चलाया गया एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान है, जो 27 नवंबर 2024 को शुरू हुआ था।

4 दिसंबर 2025 को को एक साल पूरा होने पर 100 दिवसीय गहन अभियान (4 दिसंबर 2025 से 8 मार्च 2026 तक) शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, बाल विवाह निषेध अधिकारियों (CPMO) की नियुक्ति और समुदाय की भागीदारी से बाल विवाह मुक्त भारत बनाना है।
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