नया गाजियाबाद रेलवे क्रॉसिंग के पास जलाया जा रहा कूड़ा। जागररण
जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। प्रदूषण बढ़ रहा है और जिले की हवा में जहर घोलने का काम कर रहा है। मंगलवार को गाजियाबाद 322 एक्यूआई के साथ देश के प्रदूषित शहरों में दूसरे स्थान पर रहा। पिछले तीन दिन ऑरेंज जोन में रहने के बाद फिर से यह रेड जोन में आ गया और हवा बेहद खराब श्रेणी में रही। ग्रेप-4 हटने के बाद से नियमों का भी सख्ती से पालन नहीं हो पा रहा है।
प्रदूषण की रोकथाम के नाम पर कवायदों का असर होता नहीं दिख रहा है। खासकर लोनी और वसुंधरा में हवा बेहद खराब श्रेणी में है और लोगों की सेहत पर बुरा प्रभाव डाल रही है। नगर निगम को पानी के छिड़काव और क्षतिग्रस्त सड़कों को बनवाने के लिए बजट भी मिलता है।
इसके अलावा एंटी स्मॉक गन भी जारी बजट से खरीदी जाती है, लेकिन कार्रवाई केवल छिड़काव तक ही दिखती है। यह भी लगातार नहीं होने से धूल पर नियंत्रण नहीं हो पाता है। सर्दी में कूड़ा जलाने और लकड़ी जलाने को भी प्रदूषण का कारण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि कूड़ा जलाने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसके बारे में संबंधित विभाग को बताया जा रहा है।
लोनी पर लगाम नहीं, वसुंधरा भी प्रदूषित
पिछले सप्ताहभर से लोनी और वसुंधरा में एक्यूआई अधिक नोट किया जा रहा है। मंगलवार को लोनी में 376 और वसुंधरा में 357 एक्यूआई रहा। लोनी में प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीमें लगातार कार्रवाई कर चुकी हैं, लेकिन हवा की सेहत में सुधार नहीं आ रहा है।
गाजियाबाद का एक्यूआई- 322
- इंदिरापुरम-258
- लोनी-376
- संजयनगर-298
- वसुंधरा-357
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