पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को काफी सशक्त बनाया गया है।
- अब गांवों में आरबीआइ से पंजीकृत संस्थाएं ही कर्ज के लेनदेन का कारोबार करे
राज्य ब्यूरो,रांची। पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को यह अधिकार दिया गया है कि वह निजी साहूकारी (निषेध) अधिनियम 2016 तथा छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 के तहत प्राप्त शक्तियों को प्रयोग कर क्षेत्र में साहूकारी एवं सूदखोरी को नियंत्रित करते हुए ऐसा करनेवालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।
नई व्यवस्था में ग्राम सभा ऐसे मामलों में कार्रवाई करने के लिए अधिकृत होगी। इसके साथ ही रिजर्व बैंक आफ इंडिया और सेबी से पंजीकृत संस्थाएं ही अनुसूचित क्षेत्र में कर्ज लेन-देन के लिए अधिकृत होंगी।
इन संस्थाओं को ग्राम सभा भवन या सार्वजनिक स्थल पर ब्याज की दर से संबंधित सूचना पट्ट लगाना होगा। इससे किसी भी स्तर पर धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाएगी।
पेसा एक्ट के अनुसार इन संस्थाओं को ग्राम सभा क्षेत्र में दिए गए ऋण, ब्याज की दर, ऋण की शर्तों के संबंध में प्रति वर्ष ग्राम सभा को जानकारी देनी होगी। यह व्यवस्था बिल्कुल उसी प्रकार कार्य करेगी जैसे शहरों में करती है।
पंजीकृत संस्थाओं के अलावा किसी अन्य व्यक्ति अथवा साहूकार के बारे में जानकारी मिलने पर ग्राम सभा ऐसे साहूकारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने को स्वतंत्र होगी।
ऋण चुकाने में असफल ग्रामीणों से वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई के तहत भूमि की नीलामी, कुर्की और कानूनी कार्रवाई के प्रकरण में ऐसे साहूकारों के खिलाफ एफआइआर कराने की शक्ति भी ग्राम सभा के पास होगी।
ग्राम सभा कर्जदार की न्यूनतम आवश्यकताओं एवं मानवाधिकार को सुरक्षित रखने का प्रयास करेगी। विभिन्न माध्यमों से ग्राम सभा का उद्देश्य रहेगा कि लोगों को सूदखोरी से बचाया जा सके। |
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