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मुरथल के पराठे जान पर पड़ रहे भारी! 30 से ज्यादा लोगों की हो गई मौत; सामने आई डराने वाली रिपोर्ट

deltin33 5 day(s) ago views 224
  

मुरथल में पराठे खाने या पार्टी करने जाने वाले 30 से अधिक युवा एक साल में सड़क हादसों में जान गंवा चुके हैं।



नंदकिशोर भारद्वाज, सोनीपत। मुरथल में पराठे खाने और पार्टी करने के चक्कर में एक साल में एनसीआर के 30 से अधिक युवा अपनी जान गंवा चुके हैं। यातायात नियमों का पालन न करने, शराब पीकर तेज रफ्तार में वाहन चलाने से अधिक हादसे हो रहे हैं। वहीं दोपहिया सवार भी तीन लोग बैठकर हेलमेट न लगाकर चलने से हादसों का शिकार हो रहे हैं।

अधिकतर हादसे रात के समय होते हैं। हाईवे पर व्यस्त यातायात के बीच तेज रफ्तारी हादसों का कारण बन रही है। पुलिस के जागरूकता अभियानों और चालान काटने का युवाओं पर कोई असर नहीं पड़ रहा। हादसों मेंं इकलौते बेटों को खोने के बाद मां-बाप को उनका गम ताउम्र सालता है।

ऐसे दंपतियों की जिंदगी बेटों की यादों के सहारे आंसू बहाते हुए गुजरती है। ऐसा ही हादसो सोमवार को एनएच-44 पर नांगल खुर्द फ्लाईओवर पर हुआ। इसमें पार्टी करने दिल्ली से स्कूटी पर आए तीन दोस्तों की दर्दनाक मौत हो गई। इनमें से दो युवा अपने घरों के इकलौते बेटे थे।

सात जुलाई, 2025 को बागपत के बिनौली गांव के चार युवक एक का जन्मदिन मनाने के लिए स्कार्पियो गाड़ी से मुरथल पहुंचे। यहां पार्टी करने के बाद घर लौटते समय उनकी तेज रफ्तार गाड़ी एनएच-44 पर सेक्टर-सात के फ्लाईओवर पर डिवाइडर से टकराकर दिल्ली से पानीपत लेन में जा पहुंची और सामने से आ रहे एक ट्राले से टकरा गई। हादसे के बाद गाड़ी में आग लग गई और इसमें चार युवकों की मौत हो गई।

बिनौली गांव का प्रिंस धामा अपना 28वां जन्मदिन मनाने के लिए अपने दोस्त विशाल, आदित्य और सचिन के साथ मुरथल के ढाबे पर आया था। पार्टी करने के बाद रात करीब 11:30 बजे वापसी में सेक्टर-7 फ्लाईओवर के पास स्कार्पियो ट्राले से भिड़ गई। प्रिंस और सचिन की मौके पर ही मौत हो गई।

स्कॉर्पियो पलटकर आदित्य के ऊपर जा गिरी और जलती हुई गाड़ी के नीचे दबकर उसकी भी जान चली गई। शेखर उर्फ आदित्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। विशाल भी गंभीर रूप से घायल हुआ था। प्रिंस धामा और आदित्य उर्फ शेखर परिवार के इकलौते बेटे थे।

वहीं 22 अक्टूबर, 2025 को दिल्ली के नांगलोई के सुमित, मोहित व अनुराग मुरथल से लौटते समय दिल्ली के लिवासपुर फ्लाईओवर के बाद में बुलेट बाइक डिवाइडर से टकराने से तीनों की मौत हो गई थी। तीनों में से एक दोस्त ने नई बुलेट बाइक खरीदी थी, उसी पार्टी करने के बाद वे घर लौट रहे थे। तीनों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था। सिर में चोट लगने से तीनों की मौत हो गई थी।

वहीं कुंडली में दिल्ली से मुरथल आ रहे स्कूटी सवार युवकों को कुंडली के पास अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। सड़क पर गिरे युवकों की मदद के लिए दिल्ली का एक कार सवार युवक हाईवे पर कर उनके पास जा रहा था, तभी एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उसे कुचल दिया था। हादसे में तीनों की मौत हो गई थी।

वहीं सोमवार को दिल्ली के स्कूटी सवार तीन युवकों की ट्रक से टकराकर मौत हो गई। तीनों हेलमेट नहीं पहने होने के कारण सिर में चोट लगने से तीनों की मौत हो गई। इसके अलावा हर महीने दो से तीन युवाओं की मुरथल पराठे खाने आते या जाते समय सड़क हादसों में मौत हो जाती है।


सोनीपत पुलिस एनएच-44 पर सड़क हादसों को लेकर सतर्क है। पूरे साल शराब पीकर वाहन चलाने, गलत लेन में चलने, बिना सीट बेल्ट, बिना हेलमेट या ओवर स्पीट में चलने वालों के चालान काटती है। इसके अलावा वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए भी लगातार जागरूक किया जाता है। - नरेन्द्र कादियान, डीसीपी, ट्रैफिक, सोनीपत

पांच मिनट में वापस आने की बात कहकर मुरथल के लिए निकले थे तीनों दोस्त

दिल्ली के रोहिणी से मुरथल में पार्टी करने आए स्कूटी पर सवार तीनों दोस्त अपने घर से पांच में मिनट में लौटकर आने की बात कहकर निकले थे। मुरथल के पास ट्रक से स्कूटी भिड़ने से तीनों मौत हो गई। मरने वाले मयंक, दीपक और प्रतीक उर्फ तुषार थे। इस हादसे ने तीन परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं। मयंक और प्रतीक अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। मयंक (21) ने बीकाम की पढ़ाई पूरी की थी।

अभी 23 दिसंबर को ही उसके दादा का निधन हुआ था और रविवार को ही उनकी 13वीं हुई थी। परिवार अभी उस सदमे से उबरा भी नहीं था कि इकलौते बेटे की मौत की खबर आ गई। प्रतीक के पिता की करीब 10 साल पहले मौत हो गई थी। तब से उसकी मां और बहन चाचा के साथ संयुक्त परिवार में रह रहे थे।

21 वर्षीय प्रतीक बीए सेकंड ईयर का छात्र था और घर से यह कहकर निकला था कि पांच मिनट में आ जाएगा। उसकी बड़ी बहन छोटा-मोटा काम करके घर चलाने में मदद कर रही थी। वहीं दीपक (21) अपने पिता सुगन चंद की स्कूटी लेकर दोस्तों के साथ निकला था। दीपक बीए फाइनल ईयर का छात्र था और पढ़ाई के साथ-साथ पिता की सब्जी की दुकान पर हाथ भी बंटाता था।

दीपक अपनी पढ़ाई और व्यक्तिगत खर्चों के लिए पार्टटाइम फोटोग्राफी करता था। उसने शादियों और कार्यक्रमों में फोटोग्राफी कर पैसे जोड़े थे, उसी से उसने अपना मोबाइल खरीदा था। 17 नवंबर को ही उसका जन्मदिन था। सोनीपत नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव स्वजनों को सौंप दिए गए हैं, जिन्हें लेकर वे दिल्ली रवाना हो गए हैं।

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