जेपी कारा में तीन साल से पदस्थापित सभी कर्मचारी बदले जाएंगे।
संवाद सूत्र, हजारीबाग। जेपी कारा की दीवार फांद कर तीन कैदियों के फरार हो जाने के सात दिन भी पुलिस के हाथ खाली हैं। जेपी कारा प्रशासन लगातार अपनी कमजोर कड़ी को पकड़ कर कार्रवाई कर रहा है। 30 दिसंबर की रात जेल से तीन बंदी भाग गए थे।
सोमवार को जेल अधीक्षक ने सख्ती दिखाते हुए बैरक नंबर छह और सीसीटीवी संचालन से जुड़े दो सहायक सहित चार कंम्प्यूटर आपरेटर को हटा दिया है। हटाए गए सहायकों में मोहम्मद सोनू, शालिनी कुमारी, कंप्यूटर आपरेटर विभास कुमार तथा अंगुज सिंह शामिल हैं।
सभी को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है और उन्हें शो कॉज भी जारी किया गया है। प्रबंधन से जुड़े अब तक आठ कर्मचारियों को हटाया जा चुका है। वहीं छह पूर्व सैनिक भी इस मामले में बर्खास्त किए जा चुके है।
जैप के चार जवान सुबल यादव, सुभाष महतो, कार्तिक गोराई तथा वरुण साव को निलंबित किया जा चुका है। दूसरी ओर जेल अधीक्षक सीपी सुमन ने बताया कि जेपी कारा में पिछले तीन साल से पदस्थापित सभी कर्मचारियों को हटाया जाएगा।
सुचारु नहीं थी बिजली फेंसिंग में आपूर्ति तो फिर कैसे दिया फिटनेस प्रमाण पत्र
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि सात दिन पूर्व ही एजेंसी द्वारा बिजली फेंसिंग दुरुस्त होने का प्रमाण पत्र दिया गया था। घटना के बाद एजेंसी के दावे पूरी तरह फर्जी पाए गए। जेपी कारा में बिजली फेंसिंग का संचालन सोलर पैनल से होता है।
जेल परिसर में कुल 33 स्थानों पर अलार्म सिस्टम लगाए गए हैं, पर जांच के दौरान सिर्फ गुमटी नंबर चार में ही अलार्म बजने की पुष्टि हुई। यह भी संदेहात्मक है। करोड़ो रुपये खर्च कर जेपी कारा में तत्कालीन जेल अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर के समय बिजली फेंसिंग कराई गई थी।
देखरेख का जिम्मा रांची की स्टेटिक्स सर्विस प्रोवाइडर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पास है। इस घटना के बाद कंपनी के कर्मी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। पूरे मामले में जब जांच शुरु हुई है तो फिलहाल पिछले तीन दिनों से फेंसिंग दुरुस्त करने का काम चल रहा है।
इसमें अभी सात दिन और लगने की बात कही जा रही है। सुरक्षा में लापरवाही और गलत प्रमाण देने के आरोपों के बाद संबंधित एजेंसी सवालों के घेरे में आ गई है और उसका करार रद होने की संभावना भी जताई जा रही है |
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