जागरण संवाददाता, भागलपुर। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के फैब्रिकेटेड वार्ड में ऑक्सीजन आपूर्ति में गंभीर लापरवाही सामने आई है। रविवार तड़के एजेंसी कर्मी की चूक से दस मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई। सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया और एजेंसी को कड़ी चेतावनी दी गई।
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के फैब्रिकेटेड वार्ड में रविवार अहले सुबह ऑक्सीजन आपूर्ति में भारी चूक सामने आई। एजेंसी के कर्मचारी की लापरवाही से वार्ड में भर्ती करीब दस गंभीर मरीजों की जान पर बन आई।
स्थिति की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रबंधन सक्रिय हुआ और मेडिसिन तथा एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी ने आपात बैठक बुलाकर एजेंसी प्रतिनिधि को कड़ी फटकार लगाई।
आगे से लापरवाही हुई तो सीधे दर्ज होगा मुकदमा
बैठक में भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कई अहम निर्णय लिए गए। दोनों विभागाध्यक्षों ने एजेंसी को सख्त चेतावनी दी कि आगे से किसी भी तरह की लापरवाही सामने आई तो सीधे मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जांच में सामने आया कि ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए तैनात ऑपरेटर रविवार को ड्यूटी पर मौजूद ही नहीं था।
एजेंसी के रोस्टर में अमन कुमार का नाम दर्ज था, जबकि उसे पहले ही सेवा से हटाया जा चुका था। बताया गया कि रविवार रात वार्ड में कोई अधिकृत ऑक्सीजन ऑपरेटर तैनात नहीं था। इस गंभीर चूक पर एजेंसी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई और नया रोस्टर तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
ऑक्सीजन पाइपलाइन की रोजाना करें जांच
एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि अब सात दिन में एक बार ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर माक ड्रिल कराई जाएगी। प्रतिदिन हेल्थ मैनेजर स्वयं यह जांच करेंगे कि ऑक्सीजन आपरेटर ड्यूटी पर मौजूद है या नहीं।
इसके अलावा देर रात एचओडी, हास्पिटल मैनेजर या चिकित्सक द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा। ऑक्सीजन पाइपलाइन की रोजाना जांच और किसी भी बाधा को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। ऑपरेटर को ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन के उपयोग और कार्यस्थल छोड़ने पर भी रोक लगा दी गई है।
डॉ. आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि आगे किसी भी तरह की लापरवाही पर एजेंसी मालिक, सुपरवाइजर और ऑक्सीजन ऑपरेटर के खिलाफ सीधे प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इस संबंध में सोमवार को एजेंसी को लिखित चेतावनी भी दी गई है।
तीन अधीक्षक बदले, नहीं हो सका काम
उधर, मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. राजकमल चौधरी ने बताया कि फैब्रिकेटेड वार्ड में गंभीर मरीजों को रखा जाता है, इसलिए यहां ऑक्सीजन की आपूर्ति मुख्य प्लांट से जोड़ी जानी चाहिए। उन्होंने वर्ष 2025 से अब तक सात बार अस्पताल अधीक्षक को पत्र लिखकर पाइपलाइन को प्लांट से जोड़ने का अनुरोध किया, लेकिन तीन अधीक्षक बदलने के बावजूद काम पूरा नहीं हो सका।
यदि पाइपलाइन जुड़ी होती तो यह संकट उत्पन्न नहीं होता। फिलहाल फैब्रिकेटेड वार्ड में ऑक्सीजन की आपूर्ति जंबो सिलेंडरों के जरिए की जाती है। वार्ड में पाइपलाइन तो लगी है, लेकिन उसे प्लांट से नहीं जोड़ा गया है। मुख्य स्थान पर आठ सिलेंडर लगाए जाते हैं और आठ रिजर्व रखे जाते हैं।
मरीजों की संख्या अधिक होने पर ऑक्सीजन की खपत भी बढ़ जाती है। अस्पताल में सबसे अधिक ऑक्सीजन खपत इसी वार्ड में होती है, बावजूद इसके व्यवस्था में लापरवाही सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। |
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