दिलीप कुमार, रांची। झारखंड पुलिस मुख्यालय में सोमवार को एडीजी अभियान टी. कंदसामी की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा कोषांग की बैठक हुई। इस बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग से सभी जिलों के एसएसपी, एसपी, रेंड डीआइजी व जोनल आइजी शामिल हुए।
बैठक में जनवरी से नवंबर 2024 व जनवरी से नवंबर 2025 में हुई सड़क दुर्घटनाओं की तुलनात्मक समीक्षा की गई। समीक्षा में यह बात सामने आई है कि 2024 की तुलना में 2025 में सड़क दुर्घटनाओं व इसके घायलों व मृतकों की संख्या में 10 प्रतिशत से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
सड़क दुर्घटनाओं के जख्मी को बचाने में नाकाम रही पुलिस के मामले में अधिसंख्य एसपी ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जताई है। सबका यही कहना था कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लचर होने से घायलों को बचाने में सफलता हाथ नहीं लगा रही है। अस्पतालों में डॉक्टर व आक्सीजन की कमी के कारण घायलों की जाने जा रही हैं।
इन दोनों वर्षों के नवंबर महीने में रांची में घायलों व मृतकों की संख्या में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। खूंटी व गोड्डा में सड़क दुर्घटनाएं 100 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ी हैं।
जिन जिलों में सर्वाधिक दुर्घटनाएं बढ़ीं, उनमें धनबाद, रांची, बोकारो, गिरिडीह, दुमका, खूंटी व गोड्डा आदि जिलें शामिल हैं। वहीं, जिन जिलों में दुर्घटनाएं कम हुईं, उनमें जमशेदपुर, लोहरदगा, चाईबासा, जामताड़ा व देवघर जिला शामिल हैं।
साहिबगंज के एसपी ने रंगा थाना में गत हफ्ते हुई दुर्घटना का किया जिक्र
सड़क सुरक्षा कोषांग की बैठक में अधिसंख्य एसपी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जाहिर की। साहिबगंज के एसपी ने एक ताजा उदाहरण देकर इसे प्रमाणित किया। उन्होंने रंगा थाना क्षेत्र में आटो व टैंकर में भिड़ंत का जिक्र किया।
इस घटना के बाद न तो सदर अस्पताल और न ही राजमहल अनुमंडल अस्पताल में बनाया गया ट्रामा सेंटर काम आया। कुछ साल पहले खरीदा गया कार्डियक एंबुलेंस भी किसी काम का नहीं रहा।
समय पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने से पांच घायलों की जान चली गई। झारखंड पुलिस राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा वर्ष 2026 में एक जनवरी से 31 जनवरी तक जीरो फेटालिटी मंथ के रूप में मनाएगी।
शराब के नशे में वाहन चलाना, हेलमेट व सीट बेल्ट नहीं लगाना, तेज रफ्तार हादसे की वजह
सड़क सुरक्षा कोषांग की बैठक में सड़क हादसों के कारणों की भी समीक्षा की गई। इसमें यह तथ्य सामने आया कि शराब के नशे में वाहन चलाना, हेलमेट नहीं पहनना, सीट बेल्ट नहीं लगाना व तेज रफ्तार के चलते सर्वाधिक दुर्घटनाएं हो रही हैं।
कोषांग ने यह महसूस किया कि राज्य में ड्रंक एंड ड्राइव अभियान को जिस सख्ती से चलाना चाहिए, वह नहीं हो पा रहा है। इसका असर यह है कि लोग यातायात नियमों का पालन नहीं करते हैं, जो दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनती है।
शहरी क्षेत्र से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे हैं हादसे
सभी एसपी ने समीक्षा बैठक में जानकारी दी कि शहर से ज्यादा मुफ्फसिल व ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसके पीछे की वजह यह है कि शहर में निगरानी सख्त है। ग्रामीण क्षेत्र में वाहन चालक बेधड़क नियमों को ताक पर रखकर वाहन चलाते हैं। गांवों में बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों की संख्या अधिक होती है।
कुछ दुर्घटनाएं तो ऐसी देखी जाती है, जिसमें किसी ने किसी को नहीं मारा और दुर्घटना हो गई। जैसे शराब के नशे में बिना हेलमेट पहले दोपहिया वाहन चालक ने पेड़ में सीधी टक्कर मारी, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हुआ और उसकी जान चली गई।
बैठक में ये रहे मौजूद
पुलिस मुख्यालय के सभागार में एडीजी अभियान टी. कंदसामी के साथ डीआइजी जंगल वारफेयर स्कूल नेतरहाट सह सड़क सुरक्षा कोषांग धनंजय कुमार सिंह, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के प्रबंधक तकनीकी गौतम दास व चंदन आशीष, ई-डिटेल्ड एक्सिडेंट रिपोर्ट (ई-डीएआर) व इंटिग्रेटेड रोड एक्सिडेंट डेटाबेस (आइ-आरएडी) के स्टेट रोल आउट प्रबंधक सहायक अभियंता रतन लाल मरांडी व शास्वत कुमार सिन्हा उपस्थित थे। वहीं, सभी जोनल आइजी, रेंज डीआइजी, सभी एसएसपी-एसपी वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़े थे।
इन बिंदुओं पर की गई समीक्षा
बैठक में सड़क दुर्घटना, दुर्घटना के बाद मृत्यु व जख्मी, हिट एंड रन, ई-डीएआर व आइ-आरएडी में की गई एंट्री, एमवी एक्ट के तहत की गई कार्रवाई की वर्ष 2024 व 2025 में जनवरी से नवंबर महीने तक की समीक्षा की गई। सभी एसपी को ब्लैक स्पाट के कारण हो रहीं दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सार्थक प्रयास करने को कहा गया।
एनएचएआइ, सड़क परिवहन मंत्रालय तथा राजमार्ग डिविजन के साथ ब्लैक स्पॉट पर लांग टर्म, शॉर्ट टर्म मेजर्स लेने के लिए आदेशित किया गया। ब्रेद एनालाइजर, स्पीड गन व अन्य उपकरणों का अधिकाधिक प्रयोग करने, यातायात नियम तोड़ने वालों से सख्ती बरतने को कहा गया।
ठंड व कोहरा से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया। एंबुलेंस रिस्पांडिंग व डायल-112 को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। |
|