सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा की सख्ती के बाद राजस्व कर्मचारी से लेकर अंचल अधिकारी स्तर से रैयतों को परेशान कर उगाही की नई तरकीब निकाल रहे हैं।
दाखिल-खारिज को आवेदन पर राशि की वसूली के लिए आब्जेक्टेड केस दर्ज कर दिया जा रहा है। वह भी बिना किसी आपत्ति के। इसके बाद रैयतों को आपत्ति का नोटिस भेज दोहन किया जाता है। कई रैयतों ने वरीय अधिकारियों से गुहार लगाई है।
विदित हो कि दाखिल-खारिज के लिए आवेदन की तिथि से 21 से 35 दिनों के अंदर इसका निबटारा कर दिया जाना चाहिए। आवेदन पर आपत्ति दर्ज होने पर इसका निबटारा 63 से 75 दिनों में होता है।
यही कारण है कि कई आवेदनों में बिना आपत्ति ही आब्जेक्टेड केस दर्ज कर दिया जाता है। इससे इसकी समय सीमा बढ़ जाती है। कई मामले में जान बूझकर भी आपत्ति डलवा कर दबाव दिया जाता। दूसरी ओर एक ही तरह के मामले में किसी की दाखिल-खारिज कर दी जाती तो किसी का अस्वीकृत कर दिया जाता।
इसी तरह के एक मामले में औराई के मोहन साह ने डीएम को आवेदन देकर शिकायत की है। इसमें कहा कि अंचल के एक मामले मेें जिस आदेश में दाखिल-खारिज की स्वीकृति दी गई है उसमें उसी तिथि पर आपत्ति की बात भी कही गई है। इसी तरह कांटी के एक रैयत के आवेदन में आब्जेक्टेड केस दिखाया जा रहा, जबकि इसमें कोई आपत्ति नहीं दिख रही।
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