राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राज्य में बिजली की मांग घटने, मरम्मत तथा अन्य कारणों से विद्युत उत्पादन की 22 इकाइयां बंद चल रही हैं।
कुछ इकाइयां को अल्पकाल के लिए तो कुछ को लंबी अवधि के लिए बंद किया गया हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि बंद इकाइयों से बिजली उत्पादन शुरू कर ग्रामीण क्षेत्रों को भी 24 घंटे बिजली दी जाए।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि केंद्र सरकार के कानून के कंज्यूमर राइट रूल-2020 की धारा 10 के तहत गांव-शहर सबको 24 घंटे बिजली देने मिलनी चाहिए। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य जहां अब भी रोस्टर व्यवस्था लागू है और गांवों को कुल 18 घंटे बिजली दी जा रही है।
उन्होंने कहा है कि 5000 मेगावाट से अधिक क्षमता की 22 इकाइयों से विभिन्न कारणों से बिजली का उत्पादन नहीं किया जा रहा है। जब उपभोक्ताओं से फिक्स चार्ज की वसूली की जा रही है तो उत्पादन इकाइयों को लंबे समय तक बंद रखना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।
बिजली की कम मांग, पावर परचेज एग्रीमेट का नवीनीकरण नहीं होने तथा मरम्मत के नाम पर उत्पाद इकाइयों को बंद किया गया है। मांग की है कि कंज्यूमर राइट रूल के मुताबिक बंद इकाइयों से उत्पादन शुरू कर गांवों को भी 24 घंटे बिजली दी जाए।
जिन इकाइयों को बिजली की कम मांग के कारण बंद किया है, उनसे बिजली का उत्पादन शुरू किया जाए तथा फिक्स चार्ज वसूली की जांच कराई जाए।
बताया है कि राज्य विद्युत उत्पादन निगम की अनपरा, हरदुआगंज, जवाहरपुर, ओबरा-सी और पारीछा की इकाइयों के साथ ही टांडा थर्मल पावर की चारों इकाइयां इस समय बंद हैं।  |