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दक्षिणी दिल्ली में सूख चुके 10 कुओं को मिला नया जीवन, सितंबर तक 20 होगी संख्या

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योगमाया मंदिर परिसर में जीर्णोद्धार से पहले कुएं की स्थिति। जागरण आर्काइव



शालिनी देवरानी, दक्षिणी दिल्ली। देश के कई हिस्सों में तेजी से गिरता भूजल स्तर, अनियमित मानसून और बढ़ती शहरी आबादी ने गंभीर जल संकट की चुनौतियां पैदा कर दी है। ऐसे समय में दिल्ली में पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में उठाया गया कदम एक उदाहरण बना है।

राजधानी की सबसे पुरानी बस्तियों में शामिल महरौली में दशकों से उपेक्षित ऐतिहासिक कुओं को पुनर्जीवित करने का काम जारी है। यह पहल लगातार बढ़ रहे जल संकट और गिरते भूजल स्तर का सामना कर रहे शहरों में भूजल स्तर सुधारने की दिशा में प्रशंसनीय है।

योजना के तहत महरौली के लाडो सराय स्थित शीतला माता मंदिर परिसर में मौजूद कुएं का सबसे पहले जीर्णोद्धार किया गया था। चार दशकों बाद पानी निकालने के बाद लोगों ने यहां जल आरती और विधि-विधान से पूजन किया था। इसके बाद सिद्धपीठ मां योगमाया मंदिर, वार्ड सात के राधेश्याम मंदिर परिसर, रूपन वाला, बस्ती वाला, गुड वाला, बाबा बंदा सिंह बहादुर कुएं भी पुनर्जीवित किए जा चुके हैं।

स्थानीय विधायक गजेंद्र सिंह के अनुसार, महरौली में ऐतिहासिक रूप से जल की उपलब्धता कुओं और बावलियों पर ही थी। शहरीकरण और उपेक्षा के चलते ये जलस्रोत सूख गए या मलबे में दब गए। महरौली के संकरे इलाकों में जहां पानी की आपूर्ति और बोरवेल करना चुनौती है। इन कुओं का उपयोग कर भूजल स्तर में सुधार, जल संरक्षण और घरों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
इस साल कुल 20 कुएं होंगे पुनर्जीवित

इन कुओं की देखरेख के लिए स्थानीय स्तर पर कुआं संरक्षण प्रबंधन समिति का गठन किया गया है। फरवरी 2025 में शुरू हुई इस योजना के तहत कुल 50 पुराने कुओं की पहचान की गई, जिनमें 30 कुओं को पुनर्जीवन योग्य पाया गया था।

पहले चरण में 10 कुओं के जीर्णोद्धार का कार्य जारी है, जिसमें आठ कुएं पुनर्जीवित किए जा चुके हैं और दो होने वाले हैं। फरवरी तक ये काम पूरा होने के बाद अगले चरण के लिए 10 और कुओं की पहचान की गई है। सितंबर 2026 तक इनके जीर्णोद्धार का काम पूरा किया जाएगा।
संकरी गलियों तक मोटर से पहुंचेगा पानी

महरौली पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण और संकरी गलियों की वजह से कई इलाकों में वर्षों से पानी नहीं पहुंच पा रहा था। इन इलाकों में बोरवेल भी संभव नहीं हैं, क्योंकि पानी की पर्याप्त गहराई नहीं मिलती। इसी समस्या के समाधान के लिए पुराने कुओं को दोबारा उपयोग में लाने का काम होगा।

योजना है कि इन कुओं में मोटर लगाकर पाइपलाइन जोड़कर स्थानीय घरों तक पानी की आपूर्ति की जाएगी। इससे वार्ड नंबर 3, 5, 6 और 7 के कई इलाकों को लाभ मिलेगा। प्रति कुआं खर्च दो से पांच लाख रुपये के बीच है। अब तक 10 कुओं पर लगभग 22 से 25 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
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