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पान मसाला के छोटे उद्योगों पर मंडराया बंदी का साया, एक फरवरी से बदल जाएंगे ये नियम

LHC0088 5 day(s) ago views 158
  



जागरण संवाददाता, कानपुर। पान मसाला पर एक फरवरी से स्वास्थ्य और सुरक्षा उपकर लगाने से छोटी पान मसाला इकाइयों पर बंदी का साया मंडराने लगा है। अभी तक पान मसाला निर्माण पर कम्प्नसेशन सेस लगाया जाता था। उद्यमियों को जो टैक्स अदा करना होता था, वह टैक्स के साथ अगले माह की 20 तारीख तक जमा करना होता था लेकिन अब इसे उत्पादन से पहले ही हर माह की सात तारीख तक जमा करना होगा। इससे छोटे कारोबारियों की पूंजी फंस जाएगी और कुछ माह में ही फैक्ट्री चलाने में मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।


मर्चेंट्स चैंबर की जीएसटी कमेटी के सलाहकार सीए धर्मेन्द्र श्रीवास्तव के मुताबिक अभी तक जो कम्प्नसेशन सेस लग रहा था वह 31 जनवरी को खत्म हो रहा है। इसकी जगह अब नया उपकर लगाया जा रहा है। इसमें हर इकाई को अपना पंजीयन तो कराना ही होगा, इसके साथ ही उसे हर माह सात तारीख से पहले इस उपकर को चुकाना होगा। यह सेस इतना ज्यादा होगा कि कारोबारियों की पूंजी फंसेगी।


कानपुर और आसपास की पान मसाला फैक्ट्रियों की बात की जाए तो यहां पनकी औद्योगिक क्षेत्र में एसएनके, गगन, फजलगंज औद्योगिक क्षेत्र में सर, रायल, ट्रांसपोर्ट नगर में मधु पान मसाला, मधु जर्दा, शिखर, केसर पान मसाला की फैक्ट्री हैं, वहीं गड़रियनपुरवा में सिग्नेचर, मंधना में शुद्ध प्लस, कानपुर देहात के रनिया में किसान पान मसाला की फैक्ट्री हैं।

  

कानपुर में बनने वाले कई ब्रांड बड़े भी हैं और कुछ काफी छोटे। इनमेें से जिनके पास एक से ज्यादा फैक्ट्री हैं, उन्हें हर फैक्ट्री के लिए अलग पंजीयन कराना होगा। उपकर के भुगतान की जिम्मेदारी एक फरवरी से शुरू हो जाएगी। महीने की सात तारीख से पहले उपकर जमा करना होगा। ऐसा न करने पर कम से कम 10 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। इतना ही नहीं सभी फैक्ट्री संचालकों को पैकिंग मशीन पर कैमरे लगाने होंगे। साथ ही इसकी रिकार्डिंग भी दो साल रखनी होगी।

  
देनी होगी रिकार्डिंग

अधिकारी इसे कभी भी मांग सकेंगे और उन्हें यह रिकार्डिंग 48 घंटे में देनी होगी। इससे भी फैक्ट्री संचालकों का खर्च बढ़ेगा। उपकर का भुगतान मासिक आधार पर पैकिंग मशीनों की संख्या और उनकी अधिकतम पैकिंग स्पीड के आधार पर किया जाएगा। एक फरवरी से पान मसाला, सिगरेट, तंबाकू और ऐसे उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लागू होगा। इसके अलावा उपकर होगा। अभी पान मसाला पर 28 प्रतिशत जीएसटी के अलावा उपकर लगाया जाता है।

  
जानें क्या कहते हैं सीए

सीए धर्मेन्द्र श्रीवास्तव के मुताबिक वर्ष भर में यह उपकर कई करोड़ होगा। छोटे फैक्ट्री संचालकों के पास इतना धन ही एक नंबर में नहीं होता। इतना उपकर जमा करने पर उनके पास पूंजी ही खत्म हो जाएगी और उनकी फैक्ट्रियों पर बंदी का खतरा मंडराने लगेगा। वहीं बड़े ब्रांड के पास इतनी पूंजी है कि वह वर्ष भर भी घाटे पर काम कर सकते हैं लेकिन इसके बाद उनके लिए लाभ का सौदा यह होगा कि छोटे फैक्ट्री संचालकों के मैदान से बाहर होने के बाद उनका बाजार भी उन्हें मिल जाएगा। इसके साथ बाजार में दो तरह के विकल्प हैं। इसमें एक विकल्प पाउच में पान मसाला कम करने का है और दूसरा कीमत बढ़ाने का है। इन दोनों तरह से उपकर के भार को बैलेंस करने का प्रयास हो सकता है।
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