प्रतीकात्मक तस्वीर।
मुनीश शर्मा, नोएडा। गांव देहात के सीधे साधे और बेरोजगार युवाओं को तीन से दस प्रतिशत कमीशन का लालच देकर साइबर ठग म्यूल खाते लेने का खेल कर रहे हैं। टेलीग्राम आदि से जुड़कर घर बैठे रकम कमाने का लालच देते हैं। कमीशन और एकमुश्त 50 हजार से एक लाख रुपए के लालच में आकर युवा खाता दे देते हैं। ठग बड़ी से बड़ी साइबर ठगी कर रकम आसानी से ट्रांसफर करा लेते हैं। इस रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर कर या कमीशन पर एटीएम से निकलवाकर खपाते हैं। एटीएम से नकद रकम निकलवाने में भी युवाओं काे फ्रंट पर रखा जा रहा है। एटीएम से निकासी करने और खाते की जांच होने पर युवा पकड़े जा रहे हैं। जेल जाने पर युवाओं को गलती का अहसास हो रहा है।
केस एक : 12 करोड़ रुपए की साइबर ठगी में संलिप्त होकर ठगों को बैंक खाते देने वाले बदायूं डलवा सहीदा गांव के अर्जुन सिंह, पथसा गांव के पंकज गुप्ता, नवादा गांव के रूपेंद्र व रशूलपुर गांव के तेजपाल को गौतमबुद्ध नगर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पांच दिसंबर को नोएडा बाटेनिकल गार्डन बस अड्डे के पास से गिरफ्तार किया।
एक साल पहले चारों इंटरनेट से ठगों के संपर्क में आए। सेल कंपनी के नाम पर 60 से ज्यादा करंट अकाउंट खुलवा चुके। दस प्रतिशत कमीशन पर खाते मुंबई जाकर चाइनीज ठगों को टेलीग्राम के माध्यम से भेजते। तीन से पांच प्रतिशत रकम देकर ठगी की रकम को निकलवाने का भी काम कर रहे थे। एनसीआरपी पोर्टल पर 43 शिकायतों के एवज में 35 करोड़ रुपए की ठगी में संलिप्त रहे हैं।
केस दो : शेयर बाजार में निवेश के नाम पर तीन करोड़ ऱुपए की साइबर ठगी में शामिल और ठगों को खाता देने वाले ठग को गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 20 दिसंबर को बदायूं से डोरी गांव के आमेंद्र शाक्य को दबोचा। ठगी की रकम में संलिप्त बैंक खातों की जानकारी के आधार पर आरोपित पुलिस के हत्थे चढ़ा। छह माह पहले ओमेंद्र अपने पड़ोसी गांव के तेजपाल के संपर्क में आया था।
तेजपाल की जान पहचान मुंबई लोगों से है। वह करंट खाता उपलब्ध कराने के बदले 10 प्रतिशत तक कमीशन देते। वह भी खाता देकर कमाई करने के लालच में आ गया था। ओमेंद्र ने अपना करंट खाता खुलवाने और वोगस फर्म खुलवाने के लिए कागजात दिए थे। फर्जी कागजातों के आधार पर ओमेंद्र बैक आफ बड़ौदा में खाता खुलवाया था। वह खाते को लेकर तेजपाल के दोस्त रूपेंद्र के साथ मुंबई चला गया। इसके एवज में आमेंद्र को एक लाख रुपए मिले थे। वह सात दिन मुंबई में रहा था।
क्या होते हैं म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट एक बैंक खाता है जिसका उपयोग अवैध गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिये किया जाता है। इसका इस्तेमाल साइबर ठग ठगी की रकम को ट्रांसफर करने में करते हैं। साइबर ठग लोगों से ठगी रकम को अपने बैंक खातों में ट्रांसफर नहीं करते हैं। बल्कि ठगी की रकम को पहले किसी म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर करते हैं। इस तरह ठगी की रकम को ट्रैक कर पाना मुश्किल होता है।
विगत वर्षाें में हुई साइबर ठगी
| वर्ष | ठगी | | 2025 | 153 | | 2024 | 134 | | 2023 | 183 | | 2022 | 49 | | 2021 | 32 | | 2020 | 14 |
225 में 150 से ज्यादा खाता देने वाले पकड़े
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 2025 में 225 साइबर ठगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इनमें से 150 से ज्यादा ठग बैंक खाता देने वाले शामिल रहे। जबकि पूरे ठगों ने 30 करोड़ रुपए से ज्यादा की लोगों से ठगी की। उधर, तीन विगत तीन साल की बात करें तो गौतमबुद्ध कमिश्नरेट पुलिस ने इस अवधि में एक हजार से ज्यादा ठगों पर शिकंजा कसा। 118 करोड़ रुपए फ्रीज कराए, जबकि इसमें से 58 करोड़ रुपए पीड़ितों को वापस दिलाए।
“साइबर ठग भोले-भाले युवाओं से इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म से जोड़कर करंट अकाउंट खुलवाने के एवज पैसा कमाने का लालच देते हैं। युवा ठगों की चाल को समझ नहीं पाते हैं। चंद रुपयों के लिए खाता दे देते हैं। ठग साइबर ठगी की रकम खपाने के लिए खातों का उपयोग कर रहे हैं। अनजान लोगों के दिए लालच में नहीं आए। किसी भी व्यक्ति को बैंक खाते खुलवा कर नहीं दें।“
-शैव्या गोयल, डीसीपी साइबर सुरक्षा गौतमबुद्ध नगर।
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