जागरण संवाददाता, आगरा। चंबल नदी में गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल और मगरमच्छ की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। यह संरक्षण के प्रयासों की बड़ी कामयाबी है। अक्टूबर 2025 में हुए उत्तर प्रदेश वन विभाग के सर्वे की रिपोर्ट में पता चला कि 2021 से 2025 तक बाह रेंज में इन जलीय जीवों की संख्या में इजाफा हुआ है।
चंबल अभयारण्य की डीएफओ चांदनी सिंह ने बताया वर्ष 2021 में चंबल नदी में घड़ियालों की संख्या 1860 थी, जो 2025 में बढ़कर 2026 हो गई। इसी तरह मगरमच्छ 586 से बढ़कर 869 हो गए और गंगा डॉल्फिन की संख्या 129 से बढ़कर 221 पहुंच गई।
पांच वर्ष में घड़ियाल नौ, मगरमच्छ 48, गंगा डाल्फिन 71 प्रतिशत बढ़ीं
डीएफओ चांदनी सिंह ने कहा, यह आंकड़े हमारे लंबे समय से चल रहे संरक्षण कार्य की सफलता को दर्शाते हैं। चंबल नदी का पानी साफ और पर्यावरण अनुकूल बना हुआ है, जिससे ये संवेदनशील प्रजातियां सुरक्षित रहकर प्रजनन कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि वन विभाग, वन्यजीव संगठनों और स्थानीय लोगों की मदद से घड़ियालों के घोंसलों की सुरक्षा, अवैध मछली पकड़ने और रेत खनन पर रोक लगाई गई है।
वन विभाग की ओर से किए गए सर्वे से मिली जानकारी
चांदनी सिंह ने बताया कि चंबल नदी भारत में घड़ियालों की सबसे बड़ी आबादी वाला इलाका है। यहां घड़ियाल मुख्य रूप से मछली खाते हैं, जबकि मगरमच्छ छोटे जीवों पर भी शिकार करते हैं। दोनों प्रजातियां अलग-अलग तरीके से जीती हैं, इसलिए वे एक साथ रह पाती हैं।
वर्ष घड़ियाल मगरमच्छ गंगा डॉल्फिन
- 2021 1860 586 129
- 2022 1872 594 146
- 2023 1887 608 151
- 2024 1880 742 167
- 2025 2026 869 221
डीएफओ ने बताया कि गंगा डॉल्फिन भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव है और इसकी बढ़ती संख्या खुशी की बात है। इस तरह से वन विभाग के प्रयास जारी रहेंगे। स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है कि ये जीव नदी के संतुलन के लिए जरूरी हैं। वे प्रदूषण कम करने और नदी को साफ रखने में मदद कर रहे हैं। इस सफलता से अन्य नदियों में भी संरक्षण के मॉडल अपनाए जा सकते हैं।  |