जागरण संवाददाता, भिवाड़ी। राजस्थान का प्रमुख औद्योगिक नगर भिवाड़ी वर्ष 2025 में पूरे साल वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझता रहा। सेंटर फार रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर द्वारा जारी पीएम 2.5 के आंकड़ों के अनुसार भिवाड़ी में पर्टीकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का वार्षिक औसत स्तर राष्ट्रीय मानक से लगभग दोगुना रहा। इसका प्रमुख कारण औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं, खुले में कचरा जलाना, सार्वजनिक परिवहन साधनों का अभाव, बढ़ते यातायात का दबाव और तेज शहरीकरण बताया जा रहा है।
सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों में प्रवेश कर रहे
आंकड़ों के मुताबिक, भिवाड़ी में अधिकांश महीनों में पीएम 2.5 का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर दर्ज किया गया। बढ़े हुए पीएम 2.5 के कारण सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे दमा, सांस संबंधी रोग, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
चिकित्सकों के अनुसार बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ रहा है। सर्दियों के महीनों में स्थिति और बिगड़ जाती है। भिवाड़ी में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण स्थानीय और क्षेत्रीय स्रोत हैं। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं, डीजल जनरेटर, भारी वाहनों की आवाजाही और कचरा जलाना हवा को लगातार जहरीला बना रहे हैं।
प्रदूषण का असर लंबे समय तक है रहता
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की क्लीन एयर प्रोग्राम मैनेजर शांभवी शुक्ला के अनुसार प्रदूषण केवल सीधे धुएं तक सीमित नहीं है। वाहनों और उद्योगों से निकलने वाली गैसें वातावरण में रासायनिक प्रतिक्रिया कर सेकेंडरी कणों का निर्माण करती हैं, जो अधिक महीन होते हैं और लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं। इसी वजह से प्रदूषण का असर लंबे समय तक बना रहता है।
भिवाड़ी की समस्या केवल स्थानीय नहीं
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भिवाड़ी की समस्या केवल स्थानीय नहीं है। आसपास के औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण भी यहां की हवा को प्रभावित करता है। इस कारण पूरे क्षेत्र को एक साझा “एयरशेड” माना जा रहा है। शांभवी शुक्ला ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पुराने वाहनों को हटाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, उद्योगों में स्वच्छ ईंधन अपनाने, कचरा जलाने पर सख्त रोक और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।
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