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धीमी गति के चलते सबसे आखिर में खत्म होगी दिल्ली की गाजीपुर लैंडफिल साइट, क्या है नई डेडलाइन?

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अब सबसे आखिर में खत्म होगी गाजीपुर लैंडफिल साइट। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में गाजीपुर कूड़े के पहाड़ को खत्म करने का कार्य पूर्व में सबसे तेज चल रहा था लेकिन अब स्थिति यह है कि यहां पर सबसे कम धीमी गति से कार्य हो रहा है। यही वजह है कि सबसे पहले ओखला और फिर भलस्वा लैंडफिल साइट खत्म होगी। अब सबसे आखिर में इस लैंडफिल साइट को वर्ष 2027 के दिसंबर तक खत्म किया जाना है।

इसकी धीमी गति की वजह पहले यहां लैंडफिल साइट के निस्तारण में लगी कंपनी में आपसी विवाद था जबकि अब यहां पर लगा कूड़े से बिजली बनाने का संयंत्र का तय क्षमता से काम न करना है। एमसीडी द्वारा एनजीटी में दिए गए हलफनामें यह मामला उजागर हुआ है।

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हलफनामे के अनुसार अप्रैल 2025 से शुरु हुए वित्त वर्ष में यह प्लांट तीन माह से ज्यादा समय ही बंद रहा। ऐसे में अप्रैल से दिसंबर 2025 में 275 दिन में से यह प्लांट 108 दिन संचालित ही नहीं हुआ। एमसीडी के अनुसार प्लांट की मरम्मत से लेकर चिमनी से जुड़े कार्यों के कारण व ग्रेप के कारण 12 सितंबर से पांच दिसंबर तक प्लांट बंद रहा।
तय क्षमता से भी नहीं चल रहा प्लांट

इतना ही नहीं प्लांट अपनी तय क्षमता से भी नहीं चल रहा है। फिलहाल इसकी क्षमता 1300 टन कचरा निस्तारण करके 12 मेगावाट बिजली उत्पादन की है। जबकि एनजीटी को दिए गए एमसीडी के हलफनामे के अनुसार कचरे गुणवत्ता में बदलाव और प्रेशर पार्ट्स में मरम्मत व सफाई की जरुरत की वजह से इसे कभी-कभी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ता है। जबकि इसका संचालन 24 घंटे होना चाहिए।

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रिपोर्ट में बताया कि मरम्मत होने के बाद भी 1300 टन प्रतिदिन की बजाय यहां पर 900 टन प्रतिदिन ही कचरे का निस्तारण हुआ। जबकि अप्रैल 2025 में 300 से 400 टन प्रतिदिन ही कचरा निस्तारण हुआ। मई में 500 से 800 टन प्रतिदिन, जून में 182 टन प्रतिदिन से 1082 टन प्रतिदिन रहा है। ऐसा ही दूसरे माह में रहा।
लैंडफिल पर ही डल रहा कचरा

एमसीडी का कूड़े से बिजली बनाने का संयंत्र बंद होने से यहां पर कूड़ा निस्तारण में चल कार्य धीमा हो रहा है साथ ही जो कचरे का उपयोग बिजली बनाने के लिए किया जाना चाहिए था वह लैंडफिल पर ही डलता है। जिसकी वजह से यहां पर दिसंबर 2027 में इसे खत्म करने की जो समय-सीमा है वह सही में ठीक हो पाएगी इस पर प्रश्चनचिह्न है।

यह प्लांट 2015 नवंबर में शुरू हुआ था। जिसकी क्षमता 1300 से 1500 टन प्रतिदिन निस्तारण की तय की गई थी।
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