कचरे के निस्तारण के लिए ग्रेटर नोएडा में संयंत्र लगाया जाएगा।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। विभिन्न तरह के कचरे के निस्तारण के लिए ग्रेटर नोएडा में संयंत्र लगाया जाएगा। इस संयंत्र में 88 जैविक, उद्यानिक, इलेक्ट्रानिक आदि कचरे का वैज्ञानिक प्रक्रिया से निस्तारण किया जाएगा। प्राधिकरण ने संयंत्र के लिए एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी कर कंपनियों से आवेदन मांगे हैं।
जैविक कचरे को प्रोसेस कर उससे बायो सीएनजी गैस बनाई जाएगी। इसके लिए अस्तौली में 300 टन प्रतिदिन क्षमता का संयंत्र लगाया जाएगा। इस संयंत्र का निर्माण बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) या पीपीपी माडल दोनों में से किसी एक पर होगा। इससे होने वाली कमाई में प्राधिकरण का भी हिस्सा होगा।
जैविक कचरे में फलों के छिलके, सब्जी के टुकड़े, खाद्य पदार्थ आदि को प्रोसेस किया जाएगा। अस्तौली में कूड़ा निस्तारण केंद्र परिसर में एनटीपीसी व रिलायंस को संयंत्र के लिए भूखंड दिए गए हैं।
उद्यानिक कचरे जैसे सूखे पत्ते, घास की कटाई, पेड़ों की छंटाई के अवशेष आदि को निस्तारित करने के लिए 50 टीपीडी क्षमता का संयंत्र लगाया जाएगा। प्राधिकरण की स्थापना से लेकर अब तक 40 लाख से अधिक पौधे रोपित किए गए हैं। इससे उत्पन्न हाेने वाले कचरे के निस्तारण के लिए यह संयंत्र होगा। संयंत्र लगाने व संचालक कंपनी को कचरे को एकत्र कर प्रोसेस करना होगा।
पौवारी स्थित गोशाला में बायो गैस संयंत्र लगाया जाएगा। इस संयंत्र की क्षमता 50 टीपीडी होगी। इसमें गोबर व अन्य जैविक कचरे का निस्तारण होगा। वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इससे बनने वाली बायो गैस को बेचने कर मिलने वाली राशि गोशाला के रख रखाव पर खर्च होगी।
जलपुरा स्थित गोशाला में भी बायो सीएनजी का संयंत्र लगाने का काम चल रहा है। एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस का कहना है कि जैविक, उद्यानिक व इलेक्ट्रानिक आदि कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के लिए संयंत्र लगाए जाएंगे। कंपनी चयन की प्रक्रिया चल रही है। आवेदन करने वाली कंपनियों के माडल का अध्ययन करने के बाद निविदा जारी की जाएगी।
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