दोनों सेंटर शुरू हो जाते तो पीजीआई में 1000 से अधिक नए बेड जुड़ जाते ।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। 2017 में केंद्र सरकार से मंजूरी पाने वाले पीजीआई के एडवांस्ड न्यूरो साइंस सेंटर (एएनसी) और मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर (एएमसीसी) अब तक संचालन की राह नहीं देख पाए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने यह दो सुपर स्पेशियलिटी सेंटर तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण शुरू नहीं हो सके हैं।
जानकारी के अनुसार फायर एनओसी न मिलना, जरूरी मेडिकल उपकरणों की खरीद में देरी, फंड और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के चलते दोनों प्रोजेक्ट संचालन से पहले ही ठप हो गए हैं। स्थिति यह है कि अत्याधुनिक इमारतें तो खड़ी हैं, लेकिन इलाज के लिए जरूरी संसाधन अब भी अधूरे हैं।
यदि ये दोनों सेंटर शुरू हो जाते तो पीजीआई में 1000 से अधिक नए बेड जुड़ जाते और पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों से इलाज के लिए आने वाले हजारों गंभीर मरीजों को राहत मिलती। केंद्र सरकार ने 18 अगस्त 2017 को इन परियोजनाओं को मंजूरी दी थी और इन्हें 39 महीनों में पूरा किया जाना था, लेकिन तय समय-सीमा के वर्षों बाद भी मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
एडवांस्ड न्यूरो साइंस सेंटर
करीब 485 करोड़ रुपये की लागत से बने 300 बेड वाले इस सेंटर को उत्तर भारत का सबसे बड़ा न्यूरो साइंस हब माना जा रहा है। छह मंजिला एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। फरवरी 2024 से इसमें परीक्षण, सफाई और कमीशनिंग का कार्य जारी है। इसके साथ एसी प्लांट, बायोमेडिकल उपकरणों की इंस्टालेशन और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है।
300 बेड क्षमता वाले इस केंद्र में अत्याधुनिक लैब, आपातकालीन सेवाएं और न्यूरोलाजिकल व न्यूरोसाइंस विकारों का इलाज किया जाएगा। इसके शीर्ष तल पर 10 माड्यूलर और एक माइनर आपरेशन थिएटर होंगे, जहां सेरिब्रोवास्कुलर सर्जरी, स्कल बेस सर्जरी, स्पाइनल फंक्शनल न्यूरोसर्जरी सहित अन्य गंभीर सर्जरी की जाएंगी।
मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर
लगभग 120 करोड़ रुपये की लागत से बना 300 बेड का यह सेंटर महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। पांच मंजिला एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर में 300 बेड, छह माड्यूलर आपरेशन थिएटर, हाई-रिस्क मैटरनिटी यूनिट, लेवल-3 नवजात गहन चिकित्सा यूनिट और ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा होगी।
हर वर्ष पीजीआई में 6000 से अधिक डिलीवरी होती हैं, जो आने वाले वर्षों में बढ़ने की संभावना है। नवजात गहन चिकित्सा यूनिट बेड की संख्या 22 से बढ़ाकर 105 की जा रही है, जिससे गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। |