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चंडीगढ़ मेयर चुनाव! सिर्फ एक वोट का सवाल, एक भी पार्षद दूसरी जगह गया तो पलट जाएगी बाजी

LHC0088 5 hour(s) ago views 417
  

मेयर चुनाव की तारीख की घोषणा होते ही राजनीतिक दलों ने तेज की तैयारियां।



जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। मेयर चुनाव की तारीख की घोषणा होते ही राजनीतिक दलों ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसा पहली बार होगा कि पार्षद हाथ उठाकर नए मेयर का चयन करेंगे। भाजपा और आप-कांग्रेस गठबंधन दोनों के पास 18-18 वोट हैं। ऐसी स्थिति में यदि एक भी पार्षद दूसरी जगह नहीं जाता है तो बराबर वोट पड़ने पर टाॅस से मेयर तय होगा। इस बार क्रॉस वोटिंग का डर नहीं रहेगा।

आम आदमी पार्टी की दो महिला पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस और आप ने अपने पार्षदों की घेराबंदी मजबूत कर दी है। वहीं, भाजपा की ओर से निरंतर विपक्षी पार्षदों से संपर्क किया जा रहा है। भाजपा को उम्मीद है कि मेयर पद का उम्मीदवार फाइनल होने के बाद अन्य दावेदारों की नाराजगी खुलकर सामने आएगी और उस समय उन्हें फायदा मिल जाएगा।

यह मेयर चुनाव निगम के पांच वर्ष के कार्यकाल का अंतिम चुनाव है। इसके बाद दिसंबर में नगर निगम के चुनाव होंगे। नए साल में जो मेयर चुना जाएगा, उसका कार्यकाल एक साल से कम होगा। दिसंबर में फिर से पार्षदों का चुनाव होने के कारण नवंबर में ही आचार संहिता लागू हो जाएगी।
29 को मिल जाएगा नया महापौर

29 जनवरी को शहर को नया महापौर मिल जाएगा। इसी दिन सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का भी चयन होगा। इस बार चुनाव बैलेट पेपर से नहीं, बल्कि खुले आम हाथ उठाकर किया जाएगा। पार्षद हाथ उठाकर नए मेयर का चयन करेंगे। यह पहली बार है जब मतदान प्रक्रिया में यह बदलाव किया गया है।

मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार का नाम बारी-बारी से पुकारा जाएगा। हर विकल्प पुकारे जाने पर पार्षद स्पष्ट रूप से हाथ उठाकर मतदान करेंगे। मतों की गणना दृश्य सत्यापन और मौखिक पुष्टि के माध्यम से की जाएगी और किसी भी विवाद से बचने के लिए मत रजिस्टर और बैठक की कार्यवाही में विधिवत रिकॉर्ड रखा जाएगा।
डाॅ. रमनीक बेदी को पीठासीन अधिकारी

चुनाव के लिए एक बार फिर से डाॅ. रमनीक बेदी को पीठासीन अधिकारी बनाया गया है। पिछले चुनाव में भी बेदी को ही पीठासीन अधिकारी बनाया गया था। मेयर चुनाव के दिन पार्षदों के अलावा अन्य किसी को भी नगर निगम परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। समर्थकों पर पूरी तरह से पाबंदी रहेगी, यहां तक कि पार्षदों के सुरक्षाकर्मियों पर भी पाबंदी लगाई गई है।

केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही नगर निगम परिसर में प्रवेश की अनुमति होगी। मेयर चुनाव के लिए निर्धारित प्राधिकारी डीसी हैं। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया की बिना संपादन वाली वीडियोग्राफी कराई जाएगी, जिसे न्यूनतम 90 दिनों तक या सक्षम प्राधिकारी के निर्देशानुसार सुरक्षित रखा जाएगा।
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