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देवरिया में लुटे गए सरकारी असलहे व कारतूस नौ वर्ष बाद भी बरामद नहीं, थाने में लगा दी थी आग

cy520520 7 hour(s) ago views 739
  

पुलिस पर हुए हमले के आरोपितों पर मेहरबान रहा है महकमा। सांकेतिक तस्वीर  



संवाद सूत्र, मदनपुर। आम जन की सुरक्षा का भार ढोने वाली पुलिस खुद पर हुए हमले के आरोपियों पर खासी दरियादिल रही है। नौ वर्ष पूर्व थाना फूकें जाने की घटना में शामिल आरोपितों की पहचान तक उजागर नहीं कर पाई। दहशतगर्दी के नंगे नाच के दौरान मालखाने में जमा रिवाल्वर, बंदूक के साथ लूटी गई सरकारी पिस्टल, राइफल व कारतूस भी नहीं बरामद हो पाया। गत वर्ष न्यायालय भेजे जाने को तैयार आरोप पत्र को उच्चाधिकारियों के निर्देश पर दोबारा जांच की बात कही गई थी किंतु बाद में मामला सिफर ही रहा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

बता दें चार जनवरी 2017 को मदनपुर के कोटिया मुहल्ला निवासी लापता युवक रहमतुल्लाह का शव केवटलिया गांव के समीप राप्ती नदी में तैरता मिला था। जिसके बाद उग्र हुई भीड़ ने उपनगर के साथ ही मुख्य मार्ग पर शव रख कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन की आड़ में उपद्रवियों द्वारा सड़क पर शुरू दहशतगर्दी का तांडव थाना परिसर तक पहुंच गया।

थाना भवन के साथ ही अभिलेख व वाहन आग के हवाले कर दिया गया। थाने में रखे सरकारी के साथ ही मालखाने में जमा लोगों के असलहे भी लूट लिए गए। जिसमें से कुछ राइफलें आग के हवाले होने की बात सामने आई किंतु अन्य असलहे व कारतूस आज तक बरामद नहीं हो सके।

कितने असलहे व कारतूस हुए गायब...
मिली जानकारी के अनुसार करीब एक दर्जन से अधिक 303 राइफल, एक सरकारी पिस्टल, 175 के करीब कारतूस, पिस्टल व एके 56 की मैगजीन के साथ ही मालखाने में जमा किया रिवाल्वर व बंदूक भी उग्र भींड के हाथ लग गए थे। जिसमें से 303 की कुछ राइफल भीड़ द्वारा आग के हवाले किए जाने की बात सामने आई थी।

सीओ की गाड़ी पहले हुई थी आग के हवाले
लापता युवक का शव मिलने के बाद भीड़ द्वारा उपद्रव की जानकारी मिलते ही थाने पर पहुंचे सीओ सितांशु यादव को उग्र भीड़ ने घेर लिया। उनके वाहन में आग लगा दी। हमराहियों द्वारा किसी तरह उन्हें सुरक्षित बचाया गया। जिसके बाद सरकारी वाहनों के साथ ही थाने में रखे अन्य वाहन भी आग के हवाले कर दिया गया था।

मौके पर पहुंचने में उच्चाधिकारियों को लगे कई घंटे..
मदनपुर थाना आग के हवाले किए जाने की सूचना जंगल के आग की तरह फैल गई। किंतु इतनी बड़ी घटना के बाद तत्कालीन पुलिस के मुखिया सहित अन्य अधिकारियों के साथ जिले की क्यूआरटी को मौके पर पहुंचने में घंटो लग गए थे। कार्रवाई में हुई लेट लतीफी के कारण घटना में शामिल अधिकांश आरोपित फरार होने में कामयाब हो गए।

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घटना में अलग-अलग मामलों में दर्ज हुए चार मुकदमे..
मदनपुर थाना फूंके जाने की घटना में तत्कालीन थानाध्यक्ष शोभा सिंह सोलंकी की तहरीर पर अपराध संख्या 1/2017 में 143 नामजद सहित एक हजार अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। अज्ञात की संख्या में से महज 56 के ही नाम उजागर किये जा सके। केवटलिया निवासी इन्द्रसेन यादव की तहरीर पर दर्ज अपराध संख्या 2/2017 में एक बाल अपचारी सहित 8 का नाम उजागर हुआ।

कोल्हुआ निवासी पंकज पाण्डेय द्वारा दर्ज कराए गए 3/2017 में 8 व केवटलिया के ही शिवशंकर द्वारा दर्ज मुकदमा 4/2017 में 8 आरोपितों के नाम ही सामने आए। किंतु किसी भी मामले में अज्ञात आरोपितों की पहचान में महकमा फिसड्डी साबित हुआ।



घटना के संबंध में जानकारी ली जाएगी। यदि मामले में कोई भी लापरवाही हुई है तो जांच होगी।
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-संजीव सुमन, पुलिस अधीक्षक देवरिया।
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