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उम्मीदों भरा 2026: बांका के सभी 11 प्रखंड में बनेगा मॉडल हाईस्कूल, खुलेगा डिग्री कॉलेज

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राहुल कुमार, बांका। पिछला दो साल शिक्षा विभाग में बड़े बदलावों वाला साल रहा है। शिक्षक आठ हजार से बढ़कर 12 हजार हो गए। नया साल 2026 भी जिला में बड़े बदलाव वाला साल बनेगा। इस साल सरकार हर प्रखंड में एक-एक डिग्री कालेज खोलेगी। इसके लिए कटोरिया प्रखंड में काम शुरु हो रहा है। स्नातकोत्तर की पढ़ाई भी जिला में पहली बार इस साल पीबीएस कालेज में शुरु हो जाएगी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

दशकों बाद सरकार ने सात निश्चय योजना से सभी 11 प्रखंड में एक-एक माडल हाईस्कूल बनाने का निर्णय लिया है। यह हाईस्कूल बच्चों के लिए आवासीय सुविधा वाला भी होगा। इसी वित्तीय वर्ष में इसके निर्माण का काम शुरु हो जाएगा। सरकारी विद्यालयों में संसाधनों की कमी दूर करने की दिशा में भी नया साल शानदार बनने वाला है। कई नए इंटर स्कूलों को भी नए साल में अपना नया भवन मिल जाएगा।

2026 के पहले एक-दो महीने में ही शिक्षा विभाग को जिला में अपना पहला भवन मिलेगा। इस भवन में ही शिक्षा विभाग का सभी सरकारी कार्यालय शिफ्ट हो जाएगा। जिला बनने के साढ़े तीन दशक बाद तक अभी डीईओ कार्यालय मीडिल स्कूल भवन में, स्थापना कार्यालय एसएसए बालिका स्कूल के आवास में, साक्षरता, माध्यमिक शिक्षा और लेखा-योजना कार्यालय आरएमके स्कूल आवास में तथा एसएसए किराये के मकान में चल रहा है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में बढ़ेगा कदम

नीति आयोग जिला की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा ठीक करने के लिए पिछले तीन-चार साल से लगातार प्रयास कर रही है। इसका अबतक आंशिक असर दिख रहा है। लेकिन निपुण, पीयर लर्निंग, चहक, पीबीएस जैसी योजना से अब बच्चों के सीखने की क्षमता में विकास हो रहा है। पिछले कुछ महीने में इसके माध्यम से जिला को कई उपलब्धि भी हासिल हुई है।

डीईओ देवनारायण पंडित ने बताते हैं कि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को पहली से 12वीं तक की कक्षाओं में प्रभावी करना विभाग की प्राथमिकता है। इसके लिए हमलोग के पास अब पर्याप्त संसाधन और शिक्षक उपलब्ध हैं। इस साल बच्चों के सीखने की क्षमता विकसित करने पर काम करना है। बच्चों का फेस एटेंडेंस नए साल में शुरु होते ही विद्यालयों को बच्चों के नहीं आने की शिकायत भी नहीं रहेगी।
अनामिका, खुशबू, सारिका, शंकर जैसे प्रधान बदल रहे तस्वीर

दशकों बाद शिक्षा विभाग ने उच्च और प्राथमिक विद्यालयों के लिए प्रधानों की बीपीएससी से बहाली की। पहली बार विद्यालयों को मुखिया मिलने पर वहां की तस्वीर बदलने लगी है। खासकर कई बेपटरी विद्यालय भी कुछ महीने के प्रयास से ही बदलने लगे हैं। इसमें अनामिका नंदिनी ने पास के एकसिंघा विद्यालय को बदल दिया है। हर दिन 90 प्रतिशत से अधिक बच्चे पोशाक में आ रहे हैं।

अधिकांश जूता, टाई, बैग के साथ स्कूल आ रहे हैं। रजौन मड़नी की सारिका पटानी पहले से बेहतर कर चर्चा में है। वे विद्यालय बदलने में अपने वेतन तक का पैसा लगा रही है। अपने पढ़ाने के अंदाज से पहले ही चर्चा में रही खुशबू कुमारी अब विदायडीह सरकारी स्कूल को अपनी प्रधानी में चमका रही है। नक्सल प्रभावित बेलहर के बगधसवा में शंकर दास और सैजपुर में शंकर हरिजन का काम लगातार चर्चा में है। कठेल, डांड़ा, कमलपुर सहित कई विद्यालयों में बदलाव की कहानी लिखी जा रही है।
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