डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस वैसे तो बंगाल में चल रहे एसआइआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग से मिलने आई थी, लेकिन इस दौरान वह राज्य की खराब वित्तीय स्थिति को भी बयां कर गई।
आयोग ने तृणमूल नेताओं से जब बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के लिए स्वीकृत मानदेय अब तक जारी नहीं किए जाने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने जवाब दिया कि उनके पास पैसे नहीं हैं। तृणमूल नेताओं ने यह जवाब तब दिया है जब राज्य सरकार ने बाकी के खर्चों में किसी तरह की कोई कटौती नहीं की है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
बंगाल में BLO को देने के लिए नहीं है पैसा
आयोग से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो एसआइआर के काम में लगे बीएलओ के मानदेय पर कुल लगभग 80-90 करोड़ रुपये खर्च होंगे। राज्य में कुल 80 हजार बीएलओ काम पर लगे हैं। जबकि राज्य में चुनाव पर 450-500 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है। ऐसे में यह सवाल खड़ा होगा कि राज्य की ओर से बीएलओ को क्यों परेशान किया जा रहा है।
टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच नोकझोंक
सूत्रों की मानें तो तृणमूल नेताओं के इस जवाब पर आयोग ने फिर सवाल किया कि जब राज्य की आर्थिक स्थिति ऐसी है तो फिर चुनाव कैसे कराएंगे। इस पर पहले तो तृणमूल नेता चुप रहे, फिर कहा कि उस समय की स्थिति देखी जाएगी।
इस दौरान तृणमूल नेताओं ने केंद्र सरकार पर उन्हें उनके हिस्से की धनराशि नहीं देने का आरोप भी लगाया और आयोग से दखल देने की मांग भी की। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है।
आयोग ने साफ किया कि नियमों के तहत राज्य में होने वाले चुनाव का खर्च राज्य सरकार को ही उठाना होता है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं व चुनाव आयोग के बीच बुधवार को यह नोकझोंक भरी बैठक करीब ढाई घंटे चली थी।
सूत्रों की मानें तो आयोग ने तृणमूल नेताओं की उस मांग को भी राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश मानते हुए खारिज कर दिया, जिसमें उनकी ओर से संदिग्ध मतदाताओं को जारी नोटिस की सुनवाई के दौरान राजनीतिक दलों से जुड़े बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) की मौजूदगी की मांग की थी।
आयोग ने कहा कि इस सुनवाई के दौरान राजनीतिक दलों की कोई जरूरत नहीं होती। सुनवाई के दौरान जिसे नोटिस जारी किया गया है वह व्यक्ति खुद या उसके अधिवक्ता मौजूद होते हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के बीएलए की मौजूदगी से अराजकता बढ़ेगी।
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