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बीजेपी को मिला 6654 करोड़ का चंदा; सिर्फ इतने पर सिमटी कांग्रेस; किस पार्टी को कितना मिला डोनेशन?

cy520520 2025-12-27 16:03:02 views 846
  

इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद भी भाजपा का दबदबा (प्रतिकात्मक तस्वीर)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को खत्म करने के बाद पहला पूरा वित्तीय वर्ष 2024-25 भाजपा के लिए रिकॉर्ड तोड़ साबित हुआ। भाजपा को 2024-25 में चंदे के रूप में 6,654 करोड़ रुपये मिले, जबकि कांग्रेस के चंदे में भारी गिरावट आई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें भाजपा ने बताया कि उसे चंदे के रूप में वित्तीय वर्ष 2024-25 6,654.93 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। जोपिछळने साल की तुलना में करीब 68 प्रतिशत ज्यादा है।

सदस्यता के हिसाब से विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा ने यह रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा से दो दिन पहले 8 दिसंबर को जमा की थी। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध इस रिपोर्ट में केवल 20,000 रुपये से अधिक के चंदे का डिटेल दिया गया है।

चुनाव आयोग को सौंपी रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा को मिले इस चंदा (दान) की राशि 1 अप्रैल, 2024 और 30 मार्च, 2025 के बीच प्राप्त हुई। इस अवधि के दौरान देश में लोकसभा चुनाव और अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, जम्मू और कश्मीर, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र और दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए।

इससे पहले भाजपा को पिछले वित्तीय वर्ष में 3,967 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, जबकि इस बार इसमें 68 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
भाजपा को कहां से कितना मिला चंदा?

एनडीटीबी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा को मिले चंदे का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा चुनावी ट्रस्टों से आया। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 2,180 करोड़ रुपये, प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 757 करोड़ रुपये और न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 150 करोड़ रुपये का चंदा दिया। वहीं, अन्य चुनावी ट्रस्टों से 3,112.5 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ।

शेष चंदा कंपनियों और व्यक्तियों से प्राप्त हुआ। चुनावी ट्रस्ट कंपनियों द्वारा स्थापित किए जाते हैं ताकि कंपनियों और व्यक्तियों से प्राप्त चंदे को राजनीतिक दलों में वितरित किया जा सके। कॉर्पोरेट दानदाताओं में, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने 100 करोड़ रुपये, रुंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड ने 95 करोड़ रुपये, वेदांता ने 67 करोड़ रुपये और मैक्रोटेक डेवलपर्स (अब लोढ़ा डेवलपर्स के नाम से जाना जाता है) ने 65 करोड़ रुपये का दान दिया।

वहीं, बजाज समूह की तीन अलग-अलग कंपनियों ने मिलकर 65 करोड़ रुपये का चंदा दिया, जबकि ड्राइव इन्वेस्टमेंट्स ने 50 करोड़ रुपये का योगदान दिया।

मालाबार गोल्ड ने 10 करोड़ रुपये, कल्याण ज्वैलर्स ने 15.1 करोड़ रुपये, हीरो ग्रुप ने 23.65 करोड़ रुपये, दिलीप बिल्डकॉन ग्रुप ने 29 करोड़ रुपये, आईटीसी लिमिटेड ने 35 करोड़ रुपये, वेव इंडस्ट्रीज ने 5.25 करोड़ रुपये और निखिल कामथ द्वारा प्रवर्तित जेरोधा की निवेश कंपनी ने 1.5 करोड़ रुपये का दान दिया।
भाजपा नेताओं ने भी दिए चंदे

इसके अलावा कई बीजेपी नेताओं ने भी इसमें व्यक्तिगत रूप से चंदा दिया। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 3 लाख रुपये, असम के मंत्री पीयूष हजारिका ने 2.75 लाख रुपये, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 1 लाख रुपये, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने 5 लाख रुपये, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने 1 लाख रुपये और भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय ने 1 लाख रुपये का दान दिया, साथ ही पार्टी के कई अन्य नेताओं ने भी दान दिया।
अन्य पार्टियों के चंदे

वहीं, बाकी राजनीतिक दलों के चंदों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कांग्रेस को 2024-25 में 522.13 करोड़ रुपये का चंदा मिला है, जो 2023-24 में प्राप्त 1,129 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत की भारी गिरावट है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का चंदा पिछले वर्ष के 618.8 करोड़ रुपये से घटकर 184.08 करोड़ रुपये हो गया। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को मात्र 15.09 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष के 580 करोड़ रुपये से बहुत कम है।
आप ने बढ़ाई बढ़त

इसके अलावा आम आदमी पार्टी (आप) ने चंदे में वृद्धि दर्ज की है। आप को पिछले वर्ष के 22.1 करोड़ रुपये की तुलना में 39.2 करोड़ रुपये मिले। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को पिछले वर्ष के 274 करोड़ मिले, जबकि इस बार 85.2 करोड़ रुपये मिले। वहीं, बीजू जनता दल (बीजेडी) को पिछले वित्तीय वर्ष के 246 करोड़ रुपये की तुलना में इस वर्ष केवल 60 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए।

गौरतलब है कि 2024-25 का वित्तीय वर्ष पहला ऐसा साल है, जिसमें चुनावी बांड योजना लागू नहीं है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने इसे असंवैधानिक करार दिया था। 2018 में शुरू किए गए इलेक्टोरल बॉन्ड के तहत व्यक्तियों और कंपनियों को अपनी पहचान सार्वजनिक किए बिना राजनीतिक दलों को दान देने की अनुमति दी थी। फरवरी 2024 में सर्वोच्च न्यायालय चुनावी बांड योजना को रद कर दिया। इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद यह पहला वर्ष है, जिसमें भाजपा का दबदबा देखने को मिल रहा है।
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