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पीलीभीत: रात में कोहरा, दिन में आफत: आवारा पशुओं से कब मिलेगी राहत?

deltin33 2025-12-19 21:07:04 views 1208
  

खुले में बैठे गोवंशीय पशु



संवाद सूत्र, जागरण, घुंघचाई (पूरनपुर)। क्षेत्र में पर्याप्त गोशालाओं की व्यवस्था न होने से बेसहारा पशुओं का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। नेशनल हाईवे, सड़कों और खेतों में खुलेआम घूम रहे पशुओं से आमजन और किसान दोनों परेशान हैं। स्थिति यह है कि दिन रात पशु सड़कों पर बैठे रहते हैं। इससे आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

तहसील क्षेत्र में केवल 12 गोशालाएं हैं। इन सभी में क्षमता से अधिक पशु संरक्षित है। ग्रामीण क्षेत्र में किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। किसानों का कहना है कि इस पौष माह में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। रात के समय घना कोहरा छाया रहता है। ऐसे में किसानों को खुले आसमान के नीचे रात बिता कर फसल की रखवाली करनी पड़ रही है।

जरा सी नजर चूकने पर पशुओं का झुंड खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर देते हैं। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। प्रशासन की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है। शासन के आदेश पर अधिकारी पशुओं को संरक्षित कराने को अभियान चला रहे हैं। लेकिन पशु संरक्षित करने के लिए नई गोशालाओं के बनवाने की पहल नहीं की जा रही है।

ग्राम पंचायतों के प्रधानों की ओर से पिछले लंबे समय से उच्चाधिकारियों से गांवों में गोशाला स्थापित करने की मांग की जा रही है। लेकिन इस पर अमल नहीं हो पा रहा है। प्रधानों और किसानों ने बताया कि बेसहारा पशुओं को पकड़ कर गोशालाओं में संरक्षित कराने के लिए ले जाया गया।

लेकिन उनमें पहले से ही क्षमता से अधिक पशु संरक्षित हैं। तहसील के गांव उदयपुर जगतपुर, जलेश्वर जगतपुर, कजरी निरंजनपुर, फतेहपुर खुर्द, सुल्तानपुर, गढ़ा कलां, गोमती उद्गम, अभयपुर शाहगढ़, ककरौआ देवीपुर नगर सहित 12 गरेशालाएं संचालित की जा रही है। इन सभी गोशालाओं में 850 पशुओं की क्षमता है। लेकिन एक हजार पशु संरक्षित हैं।

नगर में बनी कान्हा गोशाला में कुछ पशु संरक्षित करने की जगह बताई जा रही है। लेकिन इस गोशाला में पशुओं को संरक्षित नहीं किया जा रहा। खेतों से हाईवे और गांव की गलियों में बड़ी संख्या में पशुओं का विचरण हो रहा है। इससे किसान और आमजन परेशान हैं।

  

  


पूरनपुर ब्लाक क्षेत्र में कुल 12 गोशालाएं संचालित है। इन सभी में 850 पशु संरक्षित करने की क्षमता है। लेकिन करीब एक हजार से अधिक पशु पहले से ही संरक्षित हैं। अभियान के तहत जिनको गोशालाओं में जगह मिल रही उन पशुओं को संरक्षित कराया जा रहा है।

- डा. आशीष कुमार शर्मा, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, पूरनपुर


  


  

नई गोशाला बनाए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। पहले से बनी गोशालाओं में टीनशेड डालकर पशु संरक्षित करने की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

- हेमंत कुमार, प्रभारी बीडीओ एवं डीसी मनरेगा





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