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MCD में 17 करोड़ के घोटाले में बड़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार में शामिल कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का आदेश

Chikheang 2025-11-27 01:57:18 views 938
  

सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में करीब 17 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला।



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में करीब 17 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी के मामले में जांच के आदेश दिए जाने के एक दिन बाद, एमसीडी ने उन अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया है, जो गबन या दोहरी वित्तीय लाभ लेने के दोषी पाए गए हैं।

एमसीडी के आदेश में कहा गया है कि ऐसी शिकायतें मिली हैं कि कुछ कर्मचारियों ने जानबूझकर गलत तरीके से वित्तीय लाभ उठाया और निगम के फंड की हेराफेरी की। अतिरिक्त आयुक्त वीर सिंह यादव के हस्ताक्षरित आदेश में लिखा गया है कि यह एक बेईमानी है, जिसके लिए सख्त अनुशासनात्मक कदम अनिवार्य हैं। कोई भी कर्मचारी यदि ऐसी अनियमितताओं में शामिल होता है या मिलीभगत करता है, तो उसकी सेवा समाप्त या बर्खास्त की जाएगी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

आदेश में यह भी कहा गया है कि नियमित कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी सजा की अनुशासनात्मक कार्रवाई एक महीने के भीतर पूरी की जाएगी। दैनिक वेतनभोगियों की सेवाएं तुरंत समाप्त की जाएंगी। नियमित कर्मचारियों की सेवा भी तत्काल समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खिलाफ सीसीएस पेंशन नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

एमसीडी ने यह भी स्पष्ट किया है कि गलत दावे के बिल पास करने वाले अधिकारियों को संयुक्त रूप से दंडित किया जाएगा और ऐसे मामलों में संबंधित ड्रॉइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

गुरुवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में सदस्यों ने 17 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मुद्दा उठाया। आरोप है कि अनुबंध पर कार्यरत सहायक स्वास्थ्य निरीक्षकों को दोहरी वेतन राशि का भुगतान किया गया। सदस्य राजपाल ने बताया कि कई कर्मचारियों को एमसीडी छोड़ने के बाद भी वेतन दिया गया और इस मामले में उन्होंने अतिरिक्त आयुक्त पंकज नरेश अग्रवाल को पद से हटाने की मांग की।

अधिकारी सिंह ने जानकारी दी कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच 39 अनुबंधित सहायक स्वास्थ्य निरीक्षकों को 17 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इनमें से कई को दो बार भुगतान हुआ। उन्होंने बताया कि ये कर्मचारी ग्रुप-बी श्रेणी में आते हैं और इनके मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय या केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में होनी चाहिए थी, लेकिन ये लोग श्रम न्यायालय चले गए और समान काम का समान वेतन की मांग की।

स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने इस पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच एमसीडी के सतर्कता विभाग को सौंपी है। वहीं, निगम अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में अब सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई है।



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