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ईरान पर हमलों के बाद भावुक हुईं मंदाना करीमी ...

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मुंबई। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर किए गए हमलों की खबरों ने दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं का असर उन लोगों पर भी गहराई से पड़ा है, जिनका जन्म और बचपन ईरान में बीता है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं अभिनेत्री और मॉडल मंदाना करीमी (Mandana Karimi), जिन्होंने ईरान में हालात को लेकर अपना दर्द सार्वजनिक रूप से साझा किया है। तेहरान में जन्मीं और बीते कई वर्षों से भारत में रह रही मंदाना करीमी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह भावुक नजर आईं।





इंस्टाग्राम पर छलका दर्द


मंदाना करीमी द्वारा साझा किए गए वीडियो में वह रोते हुए दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह अपनी मातृभाषा में कुछ कहती नजर आती हैं। उनके चेहरे पर चिंता और तकलीफ साफ झलक रही है। वीडियो के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, “बहुत ज्यादा दर्द है, बहुत ज्यादा उम्मीद भी है। शायद अब नौरोज़ (ईरानी नया साल) आखिरकार अलग होगा। ईरान के लिए दुआ करें।” उनके इस संदेश से साफ है कि मौजूदा हालात ने उन्हें भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है। ईरान में जारी घटनाओं को लेकर उनकी चिंता वहां के आम नागरिकों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर है।





‘खुशी’ के वीडियो पर दिया स्पष्टीकरण


हमलों के बाद कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद कुछ जगहों पर लोगों को जश्न मनाते हुए देखा गया। इन वीडियो के संदर्भ में मंदाना करीमी ने अपनी एक और इंस्टाग्राम स्टोरी में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा,कई बार लोग जंग की वजह से खुश नहीं होते, बल्कि वो दम घुटने वाली स्थिति के खत्म होने पर खुश होते हैं। जब आप कई सालों तक दबाव में रहते हैं और आपके सपने छोटे होते जाते हैं, जब आप हर सुबह एंग्जायटी के साथ उठते हैं, तब कुछ लोग जंग को मुक्ति की तरह देखने लगते हैं। यह इसलिए नहीं कि उन्हें तबाही पसंद है, बल्कि इसलिए कि उन्हें लगता है कि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा।” मंदाना का यह बयान ईरान के भीतर जटिल सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों की ओर इशारा करता है। उन्होंने युद्ध या हिंसा का समर्थन नहीं किया, बल्कि उन मानसिक और भावनात्मक हालात की बात की, जिनसे आम लोग गुजरते हैं।





नौरोज़ का जिक्र: उम्मीद की किरण


मंदाना ने अपने संदेश में ‘नौरोज़’ का जिक्र किया, जो ईरानी नया साल होता है और पारंपरिक रूप से नई शुरुआत और उम्मीद का प्रतीक माना जाता है। उनके शब्दों से यह स्पष्ट है कि वह अपने देश के लिए बेहतर भविष्य की कामना कर रही हैं। “बहुत ज्यादा उम्मीद भी है” लिखकर उन्होंने यह संकेत दिया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद वह बदलाव की संभावना देखती हैं।

भारत में बनाया करियर


मंदाना करीमी ने भारत में बतौर मॉडल अपने करियर की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा और ‘भाग जॉनी’ तथा ‘क्या कूल हैं हम’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। उन्हें व्यापक पहचान सलमान खान के रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ से मिली। इसके अलावा वह 2022 में एकता कपूर के शो ‘लॉक अप’ में भी दिखाई दी थीं। भारत में सक्रिय रहने के बावजूद मंदाना अपने मूल देश से भावनात्मक रूप से जुड़ी रही हैं। मौजूदा घटनाओं ने इस जुड़ाव को और गहराई से सामने ला दिया है।





सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं


मंदाना के वीडियो और पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने उनके प्रति सहानुभूति जताई और ईरान के लोगों के लिए शांति की कामना की। वहीं कुछ यूजर्स ने मौजूदा घटनाओं पर अलग-अलग दृष्टिकोण भी रखे। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संघर्षों का असर प्रवासी समुदायों और विदेशों में रह रहे नागरिकों पर भी गहराई से पड़ता है। सोशल मीडिया ऐसे समय में भावनाओं को व्यक्त करने का प्रमुख माध्यम बन जाता है।


अनिश्चितता के बीच दुआ और उम्मीद


ईरान में जारी घटनाओं को लेकर अभी भी विरोधाभासी दावे और रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। आधिकारिक पुष्टि और स्पष्ट तस्वीर का इंतजार किया जा रहा है। इस अनिश्चितता के बीच मंदाना करीमी जैसी हस्तियां अपनी व्यक्तिगत भावनाओं के माध्यम से आम लोगों की चिंता और उम्मीद को सामने ला रही हैं। मंदाना का संदेश एक तरफ दर्द और बेचैनी को दर्शाता है, तो दूसरी तरफ उम्मीद और बदलाव की चाह को भी। उन्होंने किसी राजनीतिक बयानबाजी से बचते हुए मानवीय दृष्टिकोण से अपनी बात रखी है।


दर्द के बीच भी उम्मीद बाकी




ईरान पर हुए हमलों की खबरों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ाई है और इससे जुड़े लोगों की भावनाएं भी सामने आ रही हैं। मंदाना करीमी का भावुक वीडियो इस बात का उदाहरण है कि संघर्ष और अस्थिरता केवल राजनीतिक मुद्दे नहीं होते, बल्कि लाखों लोगों के व्यक्तिगत जीवन और मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। फिलहाल, दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिकी हैं। वहीं, मंदाना करीमी ने अपने संदेश के जरिए एक ही बात दोहराई है, दर्द के बीच भी उम्मीद बाकी है।








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